शनिवार, 9 नवंबर 2013

हनुमान मंदिर चलिया भाग 6.

आज शुक्रवार है ..... 1.11.2013....
आज धनतेरस है ..बाजार सजने शुरू हो चुके हैं ....
आज स्कूल के बच्चों का भी आखिरी कार्यदिवस है इसलिए सड़क पर बच्चों का और स्कूल वैन का आना जाना लगा है ...इसके बाद दिवाली की छुट्टियाँ होने जा रही हैं |
जल्दी से मेट्रो तक पहुंची हूँ ,आज स्टेशन पर काफी भीड़ है ...गाड़ी आने में अभी 3 मिनट का समय है इसलिए महिलायों के डिब्बे तक आराम से पहुँच गई हूँ ....
कभी सामने मेट्रो खड़ी होती है तो महिलायों के डिब्बे तक पहुँचने का समय नहीं होता है तो सामने खुले आम डिब्बे में ही प्रवेश कर लेते हैं .....
आज कुछ पढने का लिखने का मन नहीं कर रहा है इसलिए ऐसे ही आते जाते लोगों को देख रही हूँ ...
राजीव चौक पहुंचकर जल्दी से गेट  नंबर 7 से बाहर आ गई हूँ .....
मंदिर पहुँच गई हूँ ..... 
गर्भ गृह में प्रवेश करने से पहले ऊपर दिवार पर चालीसा लिखा हुआ है कुछ लोग वहां से ही पढ़ते हैं और कुछ लोग वहीँ से चालीसा लेकर भी पढ़ लेते हैं |

माथा टेक कर मैंने महंत जी से फूलों के बारे में बात की ...
आज कूड़ा और बाहर तक बिखरा हुआ है ,जैसा की महंत जी ने बताया इसे समाधि बोलते हैं यहाँ फूल दिए वगेरह इकठ्ठे होते रहते हैं और हर बुद्दवार को इसे भेज दिया जाता है...


मैंने उनको बताया दूसरे मंदिर वाले फूलों की समस्या से निपटने के लिए क्या कर रहे हैं ?

  • एक मंदिर के प्रधान जी ने बताया कि वो फूलों को गड्गंगा में बहाने के लिए भेजते रहे हैं ..पर अब वो भी शायद बैन हो रहा है ....
  • या फिर फूलों को अखबार पर बिछाकर छत्त पर सुखा लिया जाता है तो उससे जो बीज एकत्र होते हैं वोह नर्सरी में दे दिए जाते हैं ....
  • एक मंदिर वाले ने बताया कि कुछ खाद बनाने वाले या अगरबत्ती बनाने वाले भी ले जाते हैं 
  • कुछ ने सुझाव दिया सामग्री में भी इसका प्रयोग होता है ....कुछ सामग्री बनाने वाले भी ले जाते हैं ....

इतना बताकर मैं मंदिर से बाहर आ गई ..
मेट्रो लेकर घर पहुँच गई आज काफी भीड़ है मेट्रो में ...
जानते हैं आगे का हाल मेरे साथ ....अगले भाग में...

हनुमान मंदिर चलिया भाग 7.क्रमशः.... 
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