बुधवार, 6 नवंबर 2013

हनुमान मंदिर चलिया भाग 2.

आज सोमवार का दिन है ,28 अक्तूबर 2013 ...
 समय वोही सुबह के 6.59 .
आज जैसे ही घर से निकली तो पैर टकराया सड़क पर पड़े पत्थरों से और चप्पल टूट गई |
क्योंकि नेता जी का 5 वर्ष का कार्य अब केवल पचास दिन में पूरा होना है इसलिए कोई भी सड़क ठीक ठाक मिलना नमुमकिन है |
दोबारा घर आकर चप्पल बदली और रवाना हुई जिसमें 4 मिनट और लग गए ,आज सड़क पर भी काफी भीड़ है क्योंकि आज कार्यदिवस है इसलिए मेट्रो पहुँचने में थोड़ी देर हो गई और वहां भी भीड़ अधिक मिली |
सुबह सुबह वैसे तो छात्र छात्राएं ही अधिक होते हैं जो स्कूल तक का गंतव्य मेट्रो में तय करते हैं |
मेट्रो का आने का समय निश्चित नहीं रहता है कभी कभी तो 5 या 6 मिनट बाद आती है ,जैसे जैसे समय बढ़ता जाता है तो कभी कभी हर 3 मिनट बाद भी आ जाती है भीड़ अधिक होने के कारण |
राजीव चौक पहुँचने के बाद वोही खड़क सिंह मार्ग वाले गेट से निकलकर मंदिर की तरफ प्रस्थान किया |
यहाँ एक बात जो रोज नजर आती है मंदिर की तरफ बढ़ते हुए ....
रिवोली सिनेमा से थोड़ा आगे ही मोहन सिंह पैलेस के ठीक सामने से मंदिर तक बहुत सारे भिखारी सपरिवार सो रहे होते हैं और सफाई कर्मचारी अपना काम शुरू कर चुके होते हैं जो उनके आसपास ही झाड़ू लगाते जाते हैं ....


यह समझ से परे है कि इनका यहाँ रुकना कैसे उचित है ??
मंदिर के दोनों तरफ बैरिकेड लगे हुए हैं और खानापूर्ति के लिए मैटल डिटेक्टर भी ... यहाँ कभी कोई ड्यूटी पर नहीं होता है |
आज गद्दी पर बैठे महंत जी बदल गए हैं श्री प्रमोद शर्मा जी से आज बात हुई ...
मैंने पूछा सब तस्वीरों को चोला चढाने का क्या खर्च है ?
तो उन्होंने बताया 50,000 रुपये ,बाकी आप अपनी श्रद्धा से 1100 ,2100, 3100 तक का भी चढ़ा सकते हैं |
आज हनुमान जी का स्वर्ण श्रृंगार किया गया है ...






सामने प्रवेश करते ही आज बैनर भी बदल गया है जो दीपावली के लिए लगा दिया गया है |



जैसा कि महंत जी ने बताया कार्तिक मास तक उनका परिवार यहाँ सेवा करेगा और उनकी 46 वीं पीढ़ी इसमें लगी हुई है | 
कूड़े का ढेर और बढ़ गया है जो बाहर निकल आया है |



मंदिर में अब 8.15 हो गए हैं इसलिए मैं घर के लिए निकल पड़ी हूँ |
मेट्रो स्टेशन से जैसे ही निकली और घर की तरफ बढ़ने लगी तभी कोई जानकार बाइक पर थे वोह आए और कहने लगे कि घर छोड़ देता हूँ मैंने कहा मुझे पैदल चलना है पर वो कहाँ मानने वाले थे इसलिए उनके साथ आना पड़ा उन्होंने मुझे घर के सामने ही उतारा |
कल फिर मिलते हैं नए अनुभवों के साथ .....

हनुमान मंदिर चलिया भाग 3. क्रमशः 
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