मंगलवार, 17 सितंबर 2013

पितृ पक्ष दिवस

पितृ पक्ष का शाब्दिक अर्थ है "पूर्वजों के पखवाड़े"| इसे महालय पक्ष भी कहा जाता है |पिता-माता आदि पारिवारिक मनुष्यों की मृत्यु के पश्चात्‌ उनकी तृप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक किए जाने वाले कर्म को पितृ श्राद्ध कहते हैं।

समय :---
इसकी अवधि  16 चांद्र दिन है जब हिंदु अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं | भाद्रपद महीने के कृष्णपक्ष के पंद्रह दिन पितृपक्ष के नाम से विख्यात है। पितृ पक्ष व श्राद्ध इस वर्ष वीरवार 19 सितंबर से शुरू होने जा रहे हैं। पूर्णिमा के दिन पहला श्राद्ध होगा| इन पंद्रह दिनों में लोग अपने पितरों (पूर्वजों) को जल देते हैं |
कौन सा श्राद्ध कब :---
तिथि दिनांक
पूर्णिमा 19 सितंबर
प्रतिपदा 20 सितंबर
द्वितीया 21 सितंबर
तृतीया 22 सितंबर
चतुर्थी 23 सितंबर
पंचमी 24 सितंबर
षष्ठमी 25 सितंबर
सप्तमी 26 सितंबर
अष्टमी 27 सितंबर
नवमी 28 सितंबर
दशमी 29 सितंबर
एकादशी 30 सितंबर
द्वादशी   1 अक्टूबर
त्रयोदशी      2 अक्टूबर
चतुर्दशी 3 अक्टूबर
अमावस्या 4 अक्टूबर
पितृ पक्ष का अन्तिम दिन सर्वपित्रू अमावस्या या महालय अमावस्या के नाम से जाना जाता है। पितृ पक्ष में महालय अमावस्या सबसे मुख्य दिन होता है। 
श्राद्ध के प्रकार :---
श्राद्ध कई प्रकार के होते हैं इनमें एकोदिष्ट श्राद्ध, अनावष्टक श्राद्ध व पार्वण श्राद्ध प्रमुख हैं। एकोदिष्ट श्राद्ध वर्ष में एक बार आने वाली कालतिथि को किया जाता है। इसके अलावा सौभाग्वती स्त्रियों का श्राद्ध नवमी तिथि को किया जाता है व यह अनावष्टक श्राद्ध होता है। पितरों के लिए पार्वण श्राद्ध किया जाता है।
श्राद्ध के नियम :---
           पितृपक्ष में हिन्दू लोग मन कर्म एवं वाणी से संयम का जीवन जीते हैं; पितरों को स्मरण करके जल चढाते हैं; निर्धनों एवं ब्राह्मणों को दान देते हैं। पितृपक्ष में प्रत्येक परिवार में मृत माता-पिता का श्राद्ध किया जाता है, परंतु गया श्राद्ध का विशेष महत्व है। वैसे तो इसका भी शास्त्रीय समय निश्चित है, परंतु ‘गया सर्वकालेषु पिण्डं दधाद्विपक्षणं’ कहकर सदैव पिंडदान करने की अनुमति दे दी गई है। 
           इसलिए हिंदू धर्म शास्त्रों में पितरों का उद्धार करने के लिए पुत्र की अनिवार्यता मानी गई हैं। राजा भागीरथ ने अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए गंगा जी को स्वर्ग से धरती पर ला दिया। जन्मदाता माता-पिता को मृत्यु-उपरांत लोग विस्मृत न कर दें, इसलिए उनका श्राद्ध करने का विशेष विधान बताया गया है।
भोजन प्रसाद :---
पूर्वजों के लिए किए गए भोजन प्रसाद आमतौर पर चांदी या तांबे के बर्तन में पकाया जाता है और आम तौर पर एक केले के पत्ते या सूखे पत्तों से बने कप पर रखा जाता है. भोजन में  खीर, चावल, दाल , वसंत सेम और एक पीला लौकी शामिल करना चाहिए |



File:Pitru Paksha 2007.jpg
पितृ पक्ष करते बाणगंगा ,मुबई 

पितृपक्ष में क्या करें :- 
* पशु-पक्षियों को भोजन कराएं।
* गरीबों और ब्राह्मणों को अपने सामर्थ्यनुसार दान करें।
* शुभ और कोई नए कार्य की शुरुआत न करें।
* पितृस्त्रोत का पाठ करें।
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