शनिवार, 11 मई 2013

वैष्णो देवी यात्रा भाग 2.


दूसरा दिन 

जम्मू से कटरा :--- 
    वहां से हमने पेड टैक्सी ली कटरा तक जाने के लिए उनके चार्जेज निश्चित हैं 980 रुपए ,अगर आप टैक्सी स्टैंड से थोडा बाहर से टैक्सी लेते हैं तो वोह आपको आधे रेट पर ही मिल जाती है ,सुबह की ठंडी हवाओं का आनंद लेते हुए हम ठीक 7 बजे कटरा पहुँच गए ,यहाँ मेरी ननद का परिवार हमारा इंतज़ार कर रहा था ,उन्होंने ने पहले से ही यात्री पर्ची जो भवन के लिए कटती है कटवा ली थी |अभी पांच दिन पहले ही यह सुविधा भी ऑनलाइन उपलब्ध हो गई है ,आप एक महीना पहले ही यात्रा पर्ची ऑनलाइन ले सकते हैं |
कटरा से बाणगंगा :---
कटरा से ही हेलीकाप्टर सेवा भी उपलब्ध है जिसका भाड़ा पिछले वर्ष 700 रुपए था ,अब 800 रुपए कर दिया गया है,जिसकी बुकिंग हमें नहीं मिली क्योंकि पिछले वर्ष बुकिंग तभी के तभी कर रहे थे मौसम देख कर पर अब एक महीना पहले करवानी पड़ती है वोह भी ऑनलाइन | हमने कुछ देर वहां होटल में आराम किया और फ्रेश होकर निकल पड़े |बाहर जाकर कुछ पेट पूजा की शेरे ए पंजाब में ,फिर वहां से ऑटो लिया बाणगंगा तक का,जिसका किराया पिछले वर्ष तक 50 रुपए था , अब 100 रुपए है |
पहला दर्शन बाणगंगा :---
  • कुछ श्रद्धालु नंगे पाँव पूरी यात्रा पैदल ही करनी पसंद करते हैं ,आप ऐसा जोखिम न उठाएं ,चप्पल की बजाए जूते पहन कर यात्रा करें 
  • बाणगंगा पर ही घोडा उपलब्ध है आपकी सुविधा के लिए 780 रुपए भवन तक के लिए और 380 रुपए आध्कुवारी के लिए | 
  • असहाय बुजुर्गों के लिए और छोटे बच्चों को सुविधा से ले जाने के लिए पालकी की सुविधा भी यहीं से उपलब्ध है,जिसका किराया एक तरफ का वजन के अनुसार 2000 रुपए से लेकर 4000 रुपए तक पड़ जाता है |
  • सबसे पहली चेकिंग यहीं होती है ताकि कोई भी श्रद्धालु तम्बाकू, गुटका ,पान सुपारी या कोई भी नशीला पदार्थ या कैंची चाकू वगैरह न ले जा सके |फिर भी काफी घोड़े वाले यानि पिठ्ठू आपको बीड़ी पीते मिल जाएंगे |
  • पिट्ठू सेवा भी यहीं से उपलब्ध है इसलिए हमने कुछ भारी बैग उनको सौंप दिए और आध्कुवारी तक पैदल यात्रा शुरू की लगभग 11.40 पर |
एक कहानी जो बाणगंगा से जुड़ी है:--
श्रीधर मां वैष्णो देवी का प्रबल भक्त थे. वे वर्तमान कटरा कस्बे से 2 कि.मी. की दूरी पर स्थित हंसली गांव में रहता थे. एक बार मां ने एक मोहक युवा लड़की के रूप में उनको दर्शन दिए. युवा लड़की ने विनम्र पंडित से 'भंडारा' आयोजित करने के लिए कहा. पंडित गांव और निकटस्थ जगहों से लोगों को आमंत्रित करने के लिए चल पड़े. उन्होंने एक स्वार्थी राक्षस 'भैरव नाथ' को भी आमंत्रित किया. भैरव नाथ ने श्रीधर से पूछा कि वे कैसे अपेक्षाओं को पूरा करने की योजना बना रहे हैं. उसने श्रीधर को विफलता की स्थिति में बुरे परिणामों का स्मरण कराया. चूंकि पंडित जी चिंता में डूब गए, दिव्य बालिका प्रकट हुईं और कहा कि वे निराश ना हों, सब व्यवस्था हो चुकी है.उन्होंने कहा कि 360 से अधिक श्रद्धालुओं को छोटी-सी कुटिया में बिठा सकते हो. उनके कहे अनुसार ही भंडारा में अतिरिक्त भोजन और बैठने की व्यवस्था के साथ निर्विघ्न आयोजन संपन्न हुआ. भैरव नाथ ने स्वीकार किया कि बालिका में अलौकिक शक्तियां थीं और आगे और परीक्षा लेने का निर्णय लिया. उसने त्रिकुटा पहाड़ियों तक उस दिव्य बालिका का पीछा किया. 9 महीनों तक भैरव नाथ उस रहस्यमय बालिका को ढूँढ़ता रहा, जिसे वह देवी मां का अवतार मानता था. भैरव से दूर भागते हुए देवी ने पृथ्वी पर एक बाण चलाया, जिससे पानी फूट कर बाहर निकला. यही नदी बाणगंगा के रूप में जानी जाती है. ऐसी मान्यता है कि बाणगंगा (बाण: तीर) में स्नान करने पर, देवी माता पर विश्वास करने वालों के सभी पाप धुल जाते हैं.वैसे वहां अब कुछ लोग ही यानि परम श्रद्दालु ही खुले में स्नान करते हैं ,वहां ऐसी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है |नदी के किनारे, जिसे चरण पादुका कहा जाता है, देवी मां के पैरों के निशान हैं, जो आज तक उसी तरह विद्यमान हैं.
दूसरा दर्शन आध्कुवारी:---
सबके साथ गाते जयकारे लगाते रास्ते में रुकते एक दूसरे का इंतज़ार करते 2.40pm तक हम आध्कुवारी तक पहुँच गए थे ,घोड़े पर यह सफ़र एक घंटे में तय हो जाता है| कुछ और मेम्बर जो पीछे छूट गए थे उनका इंतज़ार करने लगे| उनके पहुँचने पर सबने श्राइन बोर्ड के ही भोजनालय में भोजन किया जिसमें कड़ी चावल ,राजमां चावल हर समय उपलब्ध हैं ब्रेड पकौड़ा ,छोले पूरी समय पर ही मिलती है |यहाँ से दो रस्ते जाते हैं एक गर्भजून जो आध्कुवारी [इसके बाद वैष्णो देवी ने आध्कुवारी के पास गर्भ जून में शरण ली, जहां वे 9 महीनों तक ध्यान-मग्न रहीं और आध्यात्मिक ज्ञान और शक्तियां प्राप्त कीं. भैरव द्वारा उन्हें ढूंढ़ लेने पर उनकी साधना भंग हुई. जब भैरव ने उन्हें मारने की कोशिश की, तो विवश होकर वैष्णो देवी ने महा काली का रूप लिया.] में स्थित है से होते हुए हाथी मत्था,सांझी छत्त से होते हुए भवन को जाता है |दूसरा रास्ता जो ऑटो के लिए बना है आसान है,चढाई कम है |
                 रात को भवन पर रुकने का मन बनाया था, मनोकामना भवन में पहले से ही कमरे बुक थे, इसलिए आध्कुवारी से भवन तक ऑटो से जाने का मन था ,जिसकी टिकट मिलने का इंतज़ार हमने 4.45pm तक किया, भीड़ के दिनों में यह सुविधा सिर्फ 65 वर्ष से ऊपर ही उपलब्ध है,पर क्योंकि भीड़ इतनी नहीं थी इसलिए टिकट आसानी से मिल गई, इसकी टिकट पिछले वर्ष तक 100 रुपए थी अब यह 300 रुपए कर दी गई है |बच्चे और पुरुष लोग सब पैदल ही जा चुके थे ,हमें ऑटो ने आधे घंटे में पहुंचा दिया ,जबकि पैदल यात्रा 2 से अढाई घंटे तक लगते हैं |वहां पहुंचकर सबका इंतज़ार किया नीचे हाल में ही कुछ नाश्ता पानी लिया ,फिर हमने कमरे में जाकर थोडा आराम किया|
यहाँ तक की कुछ तस्वीरें .....












वैष्णो देवी यात्रा भाग 3.क्रमशः ......

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