प्रभु महिमा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
प्रभु महिमा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 14 फ़रवरी 2016

वृन्दावन यात्रा भाग 5.

दोस्तों आज फिर हाजिर हूँ वृन्दावन यात्रा का 5वां भाग लेकर जो मुझे लिखना पड़ा क्योंकि दो तीन वर्ष में कुछ बदलाव आये हैं ..कुछ जल्दी ही होने वाले हैं .. 
आज जब तीसरी बार वृन्दावन जाना हुआ तो रास्ते में हम गुलशन का ढाबा ढूंढते हुए आगे निकल गए इसलिए कोई ठीक ठाक व्यवस्था वाला ढाबा या होटल देखने लगे तो याद आया रास्ते में सागररत्ना आता है तो क्यों ना वही रुका जाये इसलिए हमने वही रुकना उचित समझा और मजेदार पूरी छोले,सांबर डोसा,सांबर इडली वगेरह का आनंद लिया .. 




इसके एक घंटे बाद हम वृन्दावन में प्रवेश कर चुके थे ... वृन्दावन में प्रवेश करने से 4.. 5 किलोमीटर पहले ही नए नए मंदिरों का निर्माण कार्य चल रहा है जो काफी भव्य बनाये जा रहे हैं ... 

14 अगस्त,2015 को दोबारा  वृन्दावन जाने का मौका मिला था ...दोबारा बाँके बिहारी मंदिर में जाना हुआ ,हाल पहले से भी बदतर थे ...किवाड़ बंद थे जब सायंकाल में मंदिर खुलने का समय हुआ तो उससे पहले सभी दरवाजों के आगे काफी भीड़ लग चुकी थी ..कोई पंक्ति नहीं बनी हुई थी ... मंदिर के कपाट खुलते ही ऐसे लगा जैसे भेड़ों को किसी कमरे में सब तरफ से छोड़ दिया गया हो ...हर द्वार अंदर जाने के लिए खुल गया ... मुझे समझ नहीं आया कि निकास का रास्ता  कौनसा था ..सभी रास्ते अन्दर जाने के और सभी रास्ते  बाहर जाने के ऐसे उस भीड़ से निकलना कैसे मुमकिन था .. मैंने खुद को बहुत कोसा कि मैं जानती थी कि यही हाल होगा फिर भी मैं यहाँ क्यों आई ... 
उसी दिन जब इस्कान मंदिर गए तो वहां की व्यवस्था भी अत्यधिक भीड़ के कारण चरमरा गई थी .. जूते रखने की कोई जगह नहीं बची थी इसलिए गेट के पास ही बहुत सारे लोग जूते रखकर जा रहे थे तब हम लोगों ने बाहर किसी फल वाले के पास अपने जूते रखे थे ... 
11जनवरी,2016,दिन सोमवार ...हमारा फिर से परिवार के साथ वृन्दावन जाना हुआ तो बात शुरू हुई की पहले बांकेबिहारी मंदिर जायेंगे ..मैंने तो साफ़ इनकार कर दिया मैं नहीं जाने वाली .. सबने कहा ठीक हैअगर भीड़ हुई तो अंदर नहीं जाना .. हमने गाड़ी सड़क किनारे रोकी और आगे जाने का रास्ता पूछने लगे तो एक दो लोग सुझाने लगे कि गाड़ी पार्किंग में लगाइए जबकि ज्यादा गाड़ियाँ सड़क किनारे ही खड़ीं थी क्योंकि पार्किंग की कोई उचित व्यवस्था नजर नहीं आ रही थी जबकि वहां सरकारी बोर्ड जरुर लगा हुआ था ...हम सब गाड़ी पार्क करके जब अंदर जाने लागे तो कई पुरुष हाथ में डंडा लिए साथ साथ चल दिए यह कहकर की हम आपको रास्ता दिखायेंगे और बंदरों से आपको बचायेंगे किसी तरह उन लोगों को टालने के बाद हम वहां पहुँच गए ... कपाट खुल चुके थे सबने कहा आज तो भीड़ नही है दर्शन कर लेते हैं ... हम सब अंदर प्रवेश कर गए ... सिस्टम वही था जूते रखने का कोई प्रबंध नहीं था पर भीड़ कम थी तो हम आराम से अंदर जाकर दर्शन कर पाये .. भीड़ कम की एक वजह तो यह थी कि कोई छुट्टी का दिन नहीं था... दूसरा  कारण यह था की यात्रियों की असुविधा को देखते हुए सरकार ने इसे अपनी निगरानी में लेने की सोच ली थी जिसके विरोध में बैनर मंदिर के अंदर लगे हुए थे ...
 दूसरा बदलाव जो नजर आया वो था फोटो खींचने से कोई रोक नहीं रहा था हमने भी मंदिर के अंदर की तो नहीं लेकिन कुछ प्रांगन की तस्वीरें जरुर ले ली थी और बाहर भी कुछ व्यवस्थित दुकानें नजर आ रहीं थी ...आप भी देखियेगा ... खाने पीने की कुछ अच्छी दुकानें हैं यहाँ पर आप प्रभु पूजा के बाद पेट पूजा कर सकते हैं ... 





इसके बाद हम दोबारा गाड़ी में बैठकर इस्कान मंदिर पहुँचे यहाँ की आरती देखने के लिए विशेषतया लोग आते हैं जिसमे विदेशी स्वदेशी भक्त मंत्रमुग्ध हो आरती का आंनंद लेते हैं ... यहाँ जूता घर की विशेष व्यवस्था है जो प्रवेश द्वार के निकट ही बनाया गया है जो अंडरग्राउंड है बस इसमें भीड़ के हिसाब से जूते लेने के लिए एक या अधिक लोग होते हैं जो आपके जूते लेकर आपको टोकन देते हैं ...अगर जूते एक से अधिक हैं तो आप थैला लेकर उसमें जूते रख सकते हैं ... 



इसके बाद हम प्रेम मंदिर पहुंचे यहाँ काफी भीड़ रहती है और यहाँ की आरती का भी लोग फव्वारे में चित्र देखकर आनंद उठाते हैं .. यहाँ भी बाहर तस्वीर लेने पर कोई प्रतिबन्ध नहीं है जबकि अंदर तस्वीर लेने पर प्रतिबन्ध हैं ... यहाँ एक सुंदर और बड़ा उपाहार गृह है , जिसे राधा कृष्ण उपाहार गृह के नाम से जानते हैं ... इसी उपाहार गृह में शौचालय में अगर आप जाते हैं तो आपको वहां बाहर ही चार पाँच जोड़ी चप्पल राखी गई हैं अगर कोई अपने जूते शौचालय में नहीं ले जाना चाहे तो वो इनका प्रयोग कर सकता है ... 
आने वाले समय में मंदिरों की स्थिति में सुधार होने की पूरी उम्मीद है क्योंकि प्रशासन ने तो नहीं लेकिन केन्द्रीय सरकार ने इनको सुधारने का बीड़ा उठाया है ,इसी उम्मीद को कायम रखते हुए ... 
चलिए दोस्तों मिलते हैं फिर से जल्दी ही मथुरा यात्रा के साथ राधा कृष्ण की नगरी में तब तक के लिए शुभविदा ... 
           लेखिका ... सरिता यश भाटिया 

गुरुवार, 31 अक्टूबर 2013

हनुमान मंदिर चलिया भाग 1.

काफी दिन से मन में एक कसक सी थी कि चलिया [ यानि 40 दिन तक लगातार मंदिर जाना ]शुरू किया जाए ....
पर मौसम बदलने का इंतज़ार था ताकि रिक्शा का सफ़र पैदल तय किया जा सके | इसलिए अब मौसम के बदलते ही मैंने चलिया शुरू करने की सोची |
वैसे तो था कि सारे त्यौहार वगेरह ख़त्म हो जाएँ तभी चलिया शुरू किया जाए भैया दूज के बाद ...
पर तब तक कृष्ण पक्ष शुरू हो जायेगा यह सोच कर मैंने शुक्ल पक्ष में ही कार्तिक महीना शुभ जान मंदिर का चलिया शुरू कर दिया | 
तो आइये चलते हैं मेरे साथ हनुमान मंदिर कनाट प्लेस ...
साथ में बात करेंगे कुछ उठ रहे मुद्दों पर .... हर रोज 

पहला दिन:---


आज की छवि हनुमान जी की 

आज रविवार है ...27.10.2013... सुबह 5 बजे उठना हो ही जाता है तो मैंने अपने कुछ जरुरी घरेलू काम निपटाए और निकल पड़ी मंदिर के लिए
समय था 6.59 का...
वैसे तो आजकल बैटरी रिक्शा काफी चल रहे हैं पर मैंने पहले ही निश्चय किया था कि पैदल ही जाना है मेट्रो तक ....ताकि इसी बहाने कुछ चलना भी हो जाए,जिसके लिए इस व्यस्त जिंदगी में से समय ही नहीं निकाल पाते हैं |
ठीक 10 मिनट बाद मैं मेट्रो तक पहुँच गई थी क्योंकि रविवार था तो सड़क पर भी ज्यादा भीड़ नहीं थी |
मेट्रो का सफर तय कर पहुंची राजीव चौक ठीक  7.46 पर वहां से खडग सिंह मार्ग से बाहर निकल इंदिरा चौक पर पहुंची ,जो पालिका बाजार के बिलकुल साथ है यहाँ से दोनों तरफ से सबवे हैं ताकि व्यस्त सड़क पर से गुजरने में समय खराब न हो ...
परन्तु मैं अकेले और सुबह सुबह कभी भी इसे नहीं अपनाती क्योंकि एक तो यह सुनसान होता है और दूसरा वहां गन्दगी भी रहती है इसलिए कौन खतरा मोल ले ....
जैसे ही वहां पहुंची बिल्कुल गेट के बीचों बीच एक भिखारी कम्बल ओढे सो रहा था पास ही एक पिल्ला भाग कर आया और बैठ गया उसके पास जैसे वो फोटो खिंचवाने आया हो जो अभी आप तक पहुंचाती हूँ |



उसके बाद सड़क पार कर पहुंची मंदिर वहां इस समय तक सिर्फ एक ही जूते रखने वाला बैठा था उसके पास जूते उतार अंदर गई ....
उस दिन यहाँ होई व्रत के उपलक्ष्य में लंगर था जो एक बजे के बाद ही शुरू होता है |
माथा टेकने के बाद इसकी परिक्रमा में देखा यह फूलों का कूड़े में परवर्तित ढेर फूलों की यह दुर्दशा मन को नहीं भाई |



उसके बाद मैं बाहर निकल आई जूते पहन उसे कुछ पैसे दिए और मेट्रो की तरफ रवाना हुई और ठीक एक घंटे बाद घर पहुँच गई |

कल जानते हैं दूसरे दिन का हाल मेरे साथ ....

हनुमान मंदिर चलिया भाग 2.क्रमशः ....


गुरुवार, 12 सितंबर 2013

प्रभु सृजनकार है

प्रभु निराकार है महिमा अपरमपार है 
सारे विश्व का प्रभु, तू ही सृजनकार है 

धरती बनाई तूने,सब चाँद और सितारे 
नदियाँ बनाई तूने, जंगल,पहाड़ सारे 
सूरज की चमक में, तू ही करतार है 
सारे विश्व का प्रभु, तू ही सृजनकार है /

माता पिता तुम्ही हो,बन्धु सखा तुम्ही हो 
दिन रात गर्मी सर्दी बरसात में तुम्ही हो 
जलनिधि में जल के भरे हुए भण्डार हैं 
सारे विश्व का प्रभु, तू ही सृजनकार है /

मानव का सुन्दर चोला पाया है तुम्हीं से 
फल फूल प्यारे प्यारे सुगन्ध है तुम्ही से 
तू ही इस जीवन का सर्वोच्च आधार है 
सारे विश्व का प्रभु, तू ही सृजनकार है /

जन्म मरण है तुमसे, घृणा प्रेम तुमसे 
दीन दुखी निर्बल आंसू ख़ुशी है तुमसे 
तू ही विघ्नहर्ता ,तू ही लगाता पार है 
सारे विश्व का प्रभु, तू ही सृजनकार है /

प्रभु निराकार है महिमा अपरमपार है 
सारे विश्व का प्रभु, तू ही सृजनकार है 

मंगलवार, 10 सितंबर 2013

गणेश चतुर्थी भाग 2.

गणेश चतुर्थी पूजन के लिए 11 मन्त्र 
ऋण से मुक्ति के लिए
"ऊँ गणेश ऋणं छिन्धि वरणयं हुं नमः फट"
इस मन्त्र की एक माला का जाप करें।

संकट नाश के लिए
"ऊँ नमो हेरम्ब मदमोहित मम संकटान निवारय स्वाहा"
इस मन्त्र की 1 माला का जाप करें।

वशीकरण के लिए
"ऊँ श्रीं गं सौम्याय गणपते वरवरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा"
निम्न मन्त्र की 5 माला का जाप करें।

किसी तान्त्रिक क्रिया को नष्ट करने के लिए
"ऊँ वक्रतुंडाय हुम"
इस मन्त्र का जाप करते वक्त मुंह में पान, सुपारी, 
लौंग, इलायची, गुड़ आदि होना चाहिए। 
इसकी साधना में पवित्रता का विशेष ध्यान रखना होगा।

आलस्य, निराशा, कलह व विपत्ति नाश के लिए
"गं क्षिप्रप्रसादनाय नमः"
मन्त्र की कम से 2 माला का जाप करें।


धन व आत्मबल प्राप्ति के लिए
"ऊँ गं नमः"
निम्न मन्त्र की एक माला का जाप करें|

आर्थिक समृद्धि व रोजगार प्राप्ति के लिए
"ऊँ श्रीं गं सौभ्याय गणपते वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा"
इस मंत्र की एक माला का जाप करें।

विवाह में आने वाली बाधाओं के लिए
"ऊँ वक्रतुण्डैक दंष्टाय क्लीं ह्रीं श्रीं गं गणपते वर वरद सर्वजनं में स्वाहा"
मंत्र की कम से कम 1 माला का जाप करने से विवाह में आने 
वाली बाधायें दूर होगी और सुन्दर जीवन साथी प्राप्त होगा।

सभी मनोकामनाएं पूर्ण करने के लिये
"गं गणपते नमः"
मन्त्र का जाप करने से लगभग सभी प्रकार की 
मनोकामनायें पूर्ण होगी।

विद्या अध्ययन करते समय, विवाह के समय, 
भवन में प्रवेश करते समय, यात्रा करते समय, 
रोजगार के शुभारम्भ में, किसी भी शुभ कार्य 
करते समय गणेश के बारह नाम लेने से 
कार्यो में किसी भी प्रकार की अड़चने नहीं आयेंगी।
गणपति के 12 नाम
1- सुमुख, 2- एकदन्त, 3- कपिल, 4- गजकर्ण, 
5- लम्बोदर, 6- विकट, 7- विनायक, 8- धूम्रकेतु,
 9- गणाध्यक्ष, 10- भालचन्द्र, 11- गजानन, 12- विघ्रनाशन।

गणेश के बारह नामों के अर्थ
इन नामों का अर्थ- 
1- सुन्दर मुख वाले, 2- एक दांत वाले,
3- कपिल वर्ण के, 4- हाथी के कान वाले, 
5- लम्बे पेट वाले, 6- विपत्ति का नाश करने वाले, 
7-न्याय करने वाले, 8- धुये के रंग वाली पताका वाले,
 9- गुणों के अध्यक्ष, 10- मस्तक में चन्द्रमा धारण करने वाले 
11- हाथी के समान मुख वाले और 12- विघ्‍नों को हरने वाले।
*******


सोमवार, 9 सितंबर 2013

गणेश चतुर्थी भाग 1.

विघ्नहर्ता  गणेश के अवतरण दिवस को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है | भगवान गणेश की उपासना के लिए भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी के 10 दिन मनोकामना और दुःखों को दूर करने के लिए अति शुभ है। इस उत्सव का समापन अनन्त चतुर्दशी के दिन श्री गणेश की मूर्ति को समुद्र में विसर्जित करने के पश्चात होता है।

 गणेश चतुर्थी की अलग अलग कथाएं एवं महत्व बयां करती कुछ तस्वीरें

गणेश चतुर्थी का पावन पर्व मंगलमूर्ति विघ्नहर्ता भगवान गणेश के अवतरण दिवस के रूप में देश ही नहीं, अपितु विश्व भर के हिन्दू धर्मावलम्बियों द्वारा बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. हिन्दू दर्शन के अनुसार गणपति आदि देव हैं जिन्हें प्रथम पूज्य की गरिमामय पदवी हासिल है. शुभत्व के प्रतीक विघ्नहर्ता गणेश का पूजन यूं तो हर परिस्थिति में शुभ फलदायक होता है किन्तु भाद्रपद मास की शुक्लपक्ष की चतुर्थी तिथि को विधिविधान से किया गया भगवान गणेश का व्रत-पूजन कई गुना अधिक शुभ फल देता है.

श्रद्धालुओं की मान्यता है कि इस विशिष्ट मुहूर्त में की गयी छोटी भावपूर्ण प्रार्थना चमत्कारी परिणाम देती है. हिन्दू धर्म में हर मंगल आयोजन का शुभारंभ भगवान गणेश की पूजा-अर्चना के साथ किया जाता है. माना जाता है कि जिस शुभ आयोजन की शुरुआत गणेश पूजन के बिना होती है, उसका कोई शुभफल नहीं मिलता.

क्या है कथा-- 'शिव पुराण' के अंतर्गत रुद्र संहिता के चतुर्थ खंड (कुमार) में गणेश की उत्पत्ति की एक अन्य कथा वर्णित है. एक बार माता पार्वती ने स्नान से पूर्व एक बालक का पुतला बनाकर उसमें प्राण फूंककर उसे दुलारपूर्वक निर्देश देकर कहा, हे पुत्र, तू यह मुगदल पकड़ और इस गुफा के द्वार की निगरानी कर, मैं भीतर स्नान करने जा रही हूं. ध्यान रखना, मेरी अनुमति के बिना कोई भी भीतर प्रवेश न करने पाये.

कुछ देर बाद भगवान शिव वहां पहुंचे और गुफा के भीतर प्रवेश करने लगे तो द्वार पर तैनात बालक ने उन्हें रोक दिया. इस पर शिव क्रोधित हो उठे. नन्दी समेत अन्य गणों से उस बालक का भयानक युद्ध हुआ किन्तु वह बालक किसी के काबू में न आया. स्थिति बेकाबू होते देख शिव का क्रोध बढ़ गया और उन्होंने अपने त्रिशूल से बालक का मस्तक काट दिया. बालक के मरने का समाचार मिलते ही माता पार्वती क्रोध से आगबबूला हो उठीं.

उन्होंने प्रलय करने की ठान ली. इस पर सभी देवगण भयभीत हो उठे. उन्होंने स्तुति-विनय कर किसी तरह माता का क्रोध शांत किया. फिर ब्रह्मा, विष्णु, इंद्र आदि देवों से विचारिवमर्श के उपरान्त विष्णु जी वन में गये और उत्तर दिशा में मिले पहले जीव (हाथी) का मस्तक काट कर ले आये.

शिव ने उस मस्तक को बालक के धड़ पर स्थापित कर बालक को पुनर्जीवित कर दिया. विपदा टलने पर सभी ने हर्षनाद कर उस बालक को बुद्धि, आयु और समृद्धि के स्वामी होने के साथ प्रथम पूज्य होने का वरदान दिया. शिव ने उन्हें अपने गणों का अध्यक्ष नियुक्त किया. यही बालक गजानन गणेश नाम से लोक विख्यात हुआ.

विशिष्ट शारीरिक संरचना विघ्नहर्ता गौरी पुत्र गणेश की मनोहारी शरीराकृति भी अपने में गहरे और विशिष्ट अर्थ संजोये हुए है. लंबा उदर इनकी असीमित सहन शक्ति का परिचायक है. चार भुजाएं चारों दिशाओं में सर्वव्यापकता की प्रतीक हैं, बड़े-बड़े कान अधिक ग्राह्य शक्ति, छोटी-छोटी पैनी आंखें तीक्ष्ण दृष्टि और लम्बी सूंड महाबुद्धित्व का प्रतीक है.

प्रमुख नाम--गणपति के 12 नाम जो लोकविख्यात हैं, इस प्रकार हैं- सुमुख, एकदंत, कपिल, गजकर्णक, लम्बोदर, विकट, विघ्नविनाशक, विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचन्द्र और गजानन गणेश. लोकोत्सव दस दिनों तक मनाया जाने वाला गणेशोत्सव यूं तो पिछले कुछ वर्षों से पूरे देश में मनाया जाने लगा है किन्तु महाराष्ट्र में आयोजित होने वाली शोभा यात्राएं और झांकियां देखते ही बनती हैं. यहां गणेशोत्सव को लोकोत्सव का दर्जा हासिल है. सातवाहन, राष्ट्रकूट, चालुक्य आदि राजवंशों ने यहां गणेश उत्सव की परंपरा शुरू की थी. पेशवाओं ने भी गणेशोत्सव को बढ़ावा दिया.

छत्रपति शिवाजी महाराज भी खूब धूमधाम से गणेश उत्सव मनाते थे. कहते हैं कि पुणे में कस्बा गणपति नाम से सुप्रसिद्ध गणपति की स्थापना शिवाजी महाराज की मां जीजाबाई ने ही की थी. मगर आजादी के आंदोलन के दौरान लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने गणेशोत्सव को जो बृहद स्वरूप प्रदान किया, उससे गणेश राष्ट्रीय एकता के प्रतीक बन गये.

क्‍यों मनाते हैं गणेश चतुर्थी?
एक दिन गणेश चूहे की सवारी करते समय फिसल गये तो चन्द्रमा को हॅसी आ गयी। इस बात पर गणेश काफी क्रोधित होकर चन्द्रमा को श्राप दे दिया कि चन्द्र अब तुम किसी के देखने के योग्य नहीं रह जाओगे और यदि किसी ने तुम्हें देख लिया तो पाप का भागी होगा। श्राप देकर गणेश जी वहां से चले गये। चन्द्रमा दुःखी व चिन्तित होकर मन नही मन अपराधबोध महसूस करने लगा कि सर्वगुण सम्पन्न देवता के साथ ये मैंने क्या कर दिया?
चन्द्रमा के दर्शन न कर पाने के श्राप से देवता भी दुःखी हो गये। तत्पश्चात इन्द्र के नेतृत्व में सभी देवताओं ने गजानन की प्रार्थना और स्तुति प्रारम्भ कर दी। देवताओं की स्तुति से प्रसन्न होकर गणेश जी ने वर मांगने को कहा। सभी देवताओं ने कहा- प्रभु चन्द्रमा को पहले जैसा कर दो, यही हमारा निवेदन है। गणेश जी ने देवताओ से कहा कि मैं अपना श्राप वापस तो नहीं ले सकता हूं। किन्तु उसमें कुछ संशोधन कर सकता हूं।
जो व्यक्ति जाने-अनजाने में भी भाद्र शुक्ल चतुर्थी को चन्द्रमा के दर्शन कर लेगा, वह अभिशप्त होगा और उस पर झूठे आरोप लगाये जायेंगे। यदि इस दिन दर्शन हो जाये तो इस पाप से बचने के लिए निम्न मन्त्र का पाठ करें-
"सिंह प्रसेनमवधीत्सिंहो जाम्बवता हतः
सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्रोष स्यमन्तकः"

गणेश चतुर्थी भाग 2.क्रमशः...


रविवार, 8 सितंबर 2013

'' पर्यूषण ''

परिभाषा :---
पर्यूषण शब्द की परिभाषा व व्याख्या विभिन्न आचार्यों, साधु-साध्वियों ने विभिन्न विभिन्न रुप से की है। पर्यूषण शब्द का सन्धि-विच्छेद करते हुए परिउषण। परि का मतलब होता है चारों ओर से, सब तरफ से तथा उषण का अर्थ है दाह। जिस पर्व में कर्मों का दाह।विनाश किया जाये | 
पर्यूषण पर्व :---
पर्यूषण पर्व पर सामूहिक आराधना की जाती है। इन दिनों अध्यात्म मय माहौल देखने को मिलता है। इन दिनों में आध्यात्म पर प्रवचन, अध्यात्म का शिक्षण व अध्यात्म की साधना की प्रेरणा दी जाती है।
उद्देश्य :---
पर्यूषण पर्व को मनाने का मुख्य उद्देश्य आत्मा को शुद्ध करने के लिए आवश्यक उपक्रमों पर ध्यान केंद्रित करना होता है। पर्यावरण का शुद्धिकरण इसके लिए अनिवार्य बताया गया है।
पर्व समय:---
जैन धर्म में मुख्यतः दो सम्प्रदाय हैं- श्वेताम्बर संप्रदाय और दिगंबर संप्रदाय। श्वेताम्बर संप्रदाय को मानने वाले लोग पर्यूषण पर्व को भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी से भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की पंचमी तक मनाते हैं, जबकि दिगंबर संप्रदाय के लोग इस महापर्व को भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी से चतुर्दशी तक मनाते हैं। पर्यूषण पर्व में अनुयायी जैन तीर्थंकरों की पूजा, सेवा और स्मरण करते हैं। पर्व में शामिल होने वाले लोग आठ दिनों के लिए उपवास रखने का प्रण करते हैं, इसे 'अटाई' या आष्टान्हिक पर्व भी कहा जाता है। आठ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में एक दिन स्वप्न दर्शन होता है, जिसमें उत्सव के साथ 'त्रिशाला देवी' की पूजा तथा आराधना आदि भी की जाती है|



आठ दिन का महत्व :---
जैन धर्म का यह प्रमुख पर्व पर्युषण महापर्व आठ दिनों का ही क्यों निर्धारित किया गया है ? तो उसका उत्तर है कि हमारी आत्मा के आठ प्रमाद है :-
1) अज्ञान, 2) संशय, 3) मिथ्या ज्ञान, 4) राग, 5) द्वेष, 6) स्मृति (स्मृति-भ्रंश), 7) धर्म-अनादर, 8) योग
दुष्परिणाम में फंसी हुई आठ मद :-
1) जाति, 2) कुल, 3) बल, 4) रुप, 5) तप, 6) लाभ, 7) श्रुत, 8) ऐश्वर्य
ऐश्वर्य के कारण 8 कर्म :- 1) ज्ञानावरणीय, 2) दर्शनावरणीय, 3) वेदनीय, 4) मोहनीय, 5) आयु, 6) नाम, 7) गौत्र, 8) अनाराम- से आवृत्त होकर अपनी सच्ची अलौकिक शक्ति तथा ज्ञान को खोती चली जा रही है। प्राचीन काल में 8 दिन के उत्सव होते थे तथा किसी भी शुभ कार्य में 8 का योग होना अच्छा मानते थे। मंगल आठ माने गए हैं। सिद्ध भगवान के भी 8 गुण बताए हैं। साधु की प्रवचन माता आठ है। संयम के भी आठ भेद बताए गए हैं।योग के 8 अंग हैं। आत्मा के रूचक प्रदेश भी आठ हैं। इस प्रकार आठ की गणना बड़ी महत्वपूर्ण रही है। 
क्षमापना :---
पर्यूषण पर्व पर क्षमापना या क्षमावाणी का कार्यक्रम ऐसा है जिससे जैनेतर जनता को काफी प्रेरणा मिलती है। इसे सामूहिक रूप से विश्व-मैत्री दिवस के रूप में मनाया जा सकता है। पर्यूषण पर्व के समापन पर इसे मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी या ऋषि पंचमी को संवत्सरी पर्व मनाया जाता है।

उस दिन लोग उपवास रखते हैं और स्वयं के पापों की आलोचना करते हुए भविष्य में उनसे बचने की प्रतिज्ञा करते हैं। इसके साथ ही वे चौरासी लाख योनियों में विचरण कर रहे, समस्त जीवों से क्षमा माँगते हुए यह सूचित करते हैं कि उनका किसी से कोई बैर नहीं है।


क्षमापना मंत्र

है प्रभु पार्श्वनाथ, है प्रभु भेरवनाथ, मेरे से रात दिन हज़ारो अपराध होते रहते है.

मैं आपका दास हुं यह समझकर कृपा पूर्वक क्षमा करो |

मैं आपका आवाह्न करना नहीं जानता विसर्जन करना नहीं जानता

पूजा करने का ढंग नहीं जानता, है प्रभु मुझे क्षमा करो

मंत्रहिन् क्रियाहीन तथा भक्तिहिन् जो पूजन किया है. वह आपकी कृपा से पूर्ण हो |

है प्रभु मैं अज्ञानी हु, अपराधी हु, मैं आपकी शरण मैं आ गया हु,

इसलिए दया का पात्र  हूँ , आगे जो आपको उचित लगे वैसा करे

भूल से, अज्ञान से, बुधिभांत होने का कारन कुछ न्यूनता या अधिकता हो गयी

हो तो क्षमा करो

और जल्दी प्रसन्न हो आपतो गोपनीय से गोपनीय वास्तु की रक्षा करने वाले हो,

मेरे निवेदन किये गए इस पाठ को स्वीकार करो,

आपकी कृपा से मेरी मनोकामना पूर्ण हो |
Jain hand.svg

यदि किसीने हमारा अपराध कर दिया हो और हम उसके बदले उसे दण्ड देने में समर्थ हों, फिर भी दण्ड न दे कर उसे छोड़ दें – क्षमा कर दें तो इससे दोनों को प्रसन्नता होगी – अपराधी को भी और अपराध्य को भी|
अपराधी को तो इसलिए प्रसन्नता होगी कि वह दण्ड से बच गया और अपराध्य (जिसका अपराध किया गया है, उस व्यक्ति) को इसलिए प्रसन्नता होगी कि अपराधी को क्षमा करके उसने अपराधी के हृदय में अपनी उदारता की छाप लगा दी है – अपराधी को अपना मित्र बना लिया है – उसे सुधार दिया है या सुधरने के लिए एक अवसर और दे दिया है|
शिक्षा :---
मानव की सोई हुई अन्त:चेतना को जागृत करने, आध्यात्मिक ज्ञान के प्रचार, सामाजिक सद्भावना एवं सर्व-धर्म समभाव के कथन को बल प्रदान करने के लिए पर्यूषण पर्व मनाया जाता है। यह पर्व धर्म के साथ राष्ट्रीय एकता तथा मानव धर्म का पाठ पढ़ाता है। यह पर्व सिखाता है कि धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष आदि की प्राप्ति में ज्ञान व भक्ति के साथ सद्भावना का होना अनिवार्य है। भगवान भक्त की भक्ति को देखता है, उसकी अमीरी-गरीबी या सुख-समृद्धि को नहीं। जैन सम्प्रदाय का यह पर्व हर दृष्टीकोण से गर्व करने लायक़ है, क्योंकि इस दौरान गुरु भगवंतो के मुखारविद से अमृतवाणी का श्रवण होता है, जो हमारे जीवन में ज्ञान व धर्म के अंकुर को परिपक्व करता है।
******

हम सब आए कन्हैया,मिल के तेरे दरबार!

तू है हम सब का दाता,भरता झोली जो खाली,
करदे कृपा तू ऐसी ,हमरा बेड़ा तू तार,
हम सब आए कन्हैया,मिल के तेरे दरबार!

हम सब पौधे हैं तेरे,तू है हम सब का माली,
शरण लगालो दाता,बनके हमरी सरकार,
हम सब आए कन्हैया,मिल के तेरे दरबार!

हम सब बच्चे हैं तेरे,तू है हम सब का वाली,
तुम पार लगादो नैया ,बनके हमरी पतवार,
हम सब आए कन्हैया,मिल के तेरे दरबार!

हम सब अपने में डूबे तू करता सबकी रखवाली,
यहाँ कोई ना किसी का,हमको तेरी दरकार,
हम सब आए कन्हैया,मिल के तेरे दरबार!

सारे श्रदा से आएँ,सबका तू ही सवाली,
तू है हारे का सहारा,सुनले हमरी पुकार,
हम सब आए कन्हैया,मिल के तेरे दरबार!!
................................

रविवार, 1 सितंबर 2013

प्रभु से गुज़ारिश


पुनि पुनि जन्म मरण
से मैं छुटकारा पाऊँ 

जिंदगानी अपनी 
तेरी शरण लगाऊँ
देह बदल के अपनी
ना फिर मैं आऊँ  

पुनि पुनि जन्म मरण
से मैं छुटकारा पाऊँ 

माया जाल में पुनः
ना अब खो जाऊँ 
भवसागर से हे हरी
अब यूँ तर जाऊँ  

पुनि पुनि जन्म मरण
से मैं छुटकारा पाऊँ 

शरणागत को हे प्रभु
अपनी शरण लगाओ
नैया मेरी अब तो 
प्रभु पार लगाओ

पुनि पुनि जन्म मरण
से मैं छुटकारा पाऊँ 

गुरुवार, 8 अगस्त 2013

सच्चा तू करतार है [प्रार्थना]

यह प्रार्थना मेरे बेटे ने हमेशा लोरी की तरह सुनी है इसलिए मैंने यह उसके लिए गाई है .....

सच्चा तू करतार है सबका पालनहार है |
तेरा सबको आसरा सुखों का भण्डार है || 

नदियाँ नाले पर्वत सारे तेरी याद दिलाते हैं ...तेरी याद 
ऋषि मुनि और योगी सारे तेरे ही गुण गाते हैं |
सच्चा तू करतार ....

बादल गर्जे बिजली चमके छम छम वर्षा आती है ...छम छम 
मीठी वाणी कोयल बोले यही राग सुनाती है |
सच्चा तू करतार ...

सत चित आनंद प्रभु को वेदों ने बतलाया है .....वेदों ने...
अंत तेरा ना किसी ने पाया सुंदर तेरी माया है |
सच्चा तू करतार ....

शुभ कर्मों से मानव का यह सुंदर चोला पाया है ....सुंदर चोला .
विषय विकारों में फंस करके इसको दाग लगाया है |
सच्चा तू करतार...

नंदलाल कहे श्रद्धा से चरणों में शीश झुकाते हैं ...चरणों में 
बल बुद्धि और विद्या का हम दान आपसे चाहते हैं |
सच्चा तू करतार .... 
मेरी आवाज में सुनें ..


मंगलवार, 6 अगस्त 2013

हनुमान मंदिर ,कनॉट प्लेस ,दिल्ली भाग 2.

गर्भ गृह और चोला :----गर्भ गृह में स्वयंभू बाल हनुमान के साथ साथ राम दरबार, राधा कृष्ण विराजमान हैं | सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को मंदिर में चोला चढ़ाने की खास परंपरा है |मंगलवार के लिए सोमवार रात को और शनिवार के लिए शुक्रवार रात को चोला चढ़ाया जाता है |चोला चढ़ावे में श्रद्धालु घी, सिंदूर, चांदी का वर्क और इत्र की शीशी का इस्तेमाल करते हैं| कनाट प्लेस के हनुमान मंदिर की एक अद्भुद चमत्कारिक विशेषता है यहां हनुमानजी लगभग दस साल बाद अपना चोला छोड़कर अपने प्राचीन स्वरूप में आ जाते हैं।

चित्र:Hanuman and other deities in the Sanctum Santorum.JPG
गर्भ गृह की दीवार पर हनुमान जी 
एवं अन्य देवी देवता 

आज इसमें काफी परिवर्तन आ चुके हैं ,बाहर इसके प्रांगन का अभी लगभग दो वर्ष पहले ही नव निर्माण किया गया है ,पहले पार्किंग की व्यवस्था प्राइवेट ठेकेदार चलाते थे ,यहाँ कभी  कभी अपनी मनमानी भी करते थे ,जिसमें अब काफी सुधार हुआ है ,जबकि बहुत बढ़िया अंडर ग्राउंड पार्किंग बनाई गई है जिसका प्रयोग मैंने होते हुए कभी नहीं देखा है सब गाड़ियाँ आसपास की सडकों पर ही  खड़ी रहती हैं ,क्योंकि सामने ही कनॉट प्लेस थाना है इसलिए जब कोई उच्च अधिकारी जाँच के लिए आते हैं तो गाड़ियाँ उठा भी ली जाती हैं 
मंदिर के बाहर जूते वालों के टेंट 
         जूता घर ,शौचालयों का ,कुछ दुकानों का निर्माण भी इस निर्माण के साथ हुआ है जिनका प्रयोग ना के मात्र है ,सिर्फ शौचालय की सुविधा जरुर काम आ रही है ,जो पहले पास ही बने शनिमंदिर  तक जाना पड़ता था ,जूता घर का प्रयोग भी नहीं किया जाता क्योंकि कोई निशुल्क सेवा नहीं करना चाहता जो बहुत सारे लोग बाहर टेंट लगा कर बैठते हैं वोह बेकार हो जाते हैं ,क्योंकि 15...15 वर्षों से वो यहाँ से कमाई कर रहे हैं जो भी भक्तजन आते हैं अपनी श्रद्दा से 5...10 रुपये दे जाते हैं ,जबकि अब सुरक्षा की दृष्टि से टेंट हटा दिए गए हैं फिर भी जूता घर के बाहर ही  सब जूते वाले नजर आते हैं 

सुनसान जूता घर 
बाहर प्रांगन में बहुत सारी प्रसाद की ,भेंट खिलौने आदि की दुकानें हैं , कचोरी वाले मेंहदी वाले प्रांगन में जगह जगह पर कब्ज़ा जमाये हुए हैं बहुत सारे ज्योतिषी तांत्रिक भी मुख्यता मंगलवार और शनिवार को नजर आते हैं | त्योहारों पर मेहंदी लगवाने के लिए यहाँ औरतों का जमावड़ा रहता है |
नवभारत टाइम्स से साभार :----
यह मंदिर कनॉट प्लेस के व्यस्त इलाके में है, इसलिए इसकी सुरक्षा को लेकर खासे इंतजाम किए गए हैं। मंदिर के अंदर 21 सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। मंगलवार व शनिवार को वहां खासी सुरक्षा होती है और पुलिस का पर्याप्त इंतजाम किया जाता है। मंदिर और उसके आसपास सफाई व्यवस्था को लेकर भी खासी सजगता भी दिखाता है मंदिर प्रशासन ,ऐसा यहाँ के महंतजी का कहना है । 
             यह मंदिर आम के साथ साथ खास लोगों में भी खासा लोकप्रिय है। पुराने कलाकारों में राजकुमार से लेकर आज के फिल्मी स्टार आमिर खान सचिन तेंदुलकर भी सीपी के इस भव्य मंदिर के दर्शन कर चुके हैं। देश और दिल्ली के छोटे बड़े नेता भी जब तब इस मंदिर में आकर शीश नवाते रहे हैं।
भगवान दर्शन की विशेष तिथियाँ :---
इसके अतिरिक्त साल में चार तिथियां इस मंदिर के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं. दीपावली, हनुमान जयंती, जन्माष्टमी, और शिवरात्रि के दिन मंदिर में बाल हनुमान का विशेष श्रृंगार किया जाता है. इस दिन भगवान को सोने का श्रंगार किया जाता है। यहां मनौती मानने वाले भक्त बड़ी संख्या में संसारभर से आते हैं और मनौती पूर्ण होने पर भगवान को सवामनी चढ़ाते हैं।
          कनॉट प्लेस में हनुमान मंदिर के निकट स्थित एशिया के सबसे बड़े फूलों के बाजार में पिछले पंद्रह सालों से फूलों का बाजार भी लगता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2006-2007 में कुल 649.84 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ जबकि पिछले वर्ष यह 210.99 करोड़ रुपये का था। केवल दिल्ली से लगभग 100 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ है।अभी दो वर्ष से यह बाजार लगना बंद हो गया है 
           कनाट प्लेस देश और दिल्ली का व्यावसायिक केंद्र होने के साथ ही धर्म और आस्था का भी केंद्र है | इस लिहाज से कनाट प्लेस स्थित हनुमान मंदिर पर्यटन और धार्मिक पर्यटन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है | अमूमन देश विदेश से आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु इस मंदिर में शीश झुकाना नहीं भूलते | मंगलवार और शनिवार भगवान हनुमान के पूजन के दो विशेष दिन हैं | इन दिनों में मंदिर 24 घंटे के लिए खुला होता है यानि इन दिनों भगवान ओवरटाइम करते हैं |
कुछ विशेष जानकारी :----
        यहाँ गद्दी पर विराजमान पुरोहित जी से जब मैंने महंत परम्परा की  जानकारी मांगी तो उन्होंने बताया यहाँ इस समय 36 महंत हैं जिनके बेटे बारी बारी से यहाँ मंदिर का कार्य सँभालते हैं जैसे जिसका एक बेटा है वोह एक दिन जिसके दो बेटे हैं दो दिन जिसके चार हैं वोह उसी क्रम में मंदिर की सेवा करते हैं उनके दिन निश्चित हैं |
          दूसरी जानकारी मैंने मंदिर के बाहर बैठने वाले जय सिंह से ली जो 1984 से जूता सेवा कर रहे हैं ,जैसा की उन्होंने बताया कि उनके पिता कनी सिंह जी ने 50 वर्ष इसी मंदिर के बाहर जूता सेवा की है जो अपने पिता जी और एक किसी और सज्जन को सबसे पुराने सेवादार बताते हैं |इससे स्पष्ट है कि मंदिर संभालने का और जूता सेवा का यह काम पीड़ी दर पीड़ी चला आ रहा है |
      मैंने कई बार गद्दी पर बैठे महंत जी से अनुरोध किया है कि इस प्राचीन मंदिर की गरिमा बनाए रखने के लिए श्रद्धालुओं को माथा टेकने में आने वाली भीड़ की समस्या का उचित प्रबंध किया जाए ,जोकि थोड़ी सी सावधानी से हो सकता है ताकि उनको यह सूचना बार बार ना देनी पड़े कि जेबकतरों से सावधान रहें,लेकिन कोई कारवाई नहीं होती है अब मंदिर प्रशासन से बात कर इसका समाधान हो सकता है |

                                  *************************************************

सोमवार, 5 अगस्त 2013

हनुमान मंदिर , कनॉट प्लेस , दिल्ली भाग 1.


दोस्तो आज आप सबसे साँझा करने जा रही हूँ सबसे बड़े दक्षिणमुखी  हनुमान मंदिर ,कनॉट प्लेस ,दिल्ली से जुडी कुछ स्मृतियाँ एवं इसके इतिहास के बारे में ,जहां कई वर्षों से लगातार जाना होता रहता है |
स्थिति :----
यह मंदिर बाबा खड़ग सिंह मार्ग पर स्थित है |दिल्ली मेट्रो के राजीव चौक स्टेशन से यह मात्र 500 मीटर की दूरी पर है यहां पहुँचने के लिए ब्लू लाइन या येलो लाइन का प्रयोग कर सकते हैं |वहां से खडक सिंह मार्ग वाले रास्ते से बाहर आकर आप पैदल ही आसानी से यहाँ पहुँच सकते हैं |इसके पास ही  बंगला साहिब गुरुद्वारा ,चर्च ,मस्जिद विराजमान हैं | 
परिचय :-----नई दिल्ली के हृदय कनॉट प्लेस में महाभारत कालीन श्री हनुमान जी का एक प्राचीन मंदिर है।यहाँ पर उपस्थित हनुमान जी स्वयंभू हैं। बालचन्द्र अंकित शिखर वाला यह मंदिर आस्था का महान केंद्र है।प्रत्येक मंगलवार एवं विशेषतः हनुमान जयंती के पावन पर्व पर यहां भजन संध्या और भंडारे लगाकर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाता है। इसके साथ ही भागीरथी संस्था के तत्वाधान में संध्या का आयोजन किया जाता है, साथ ही क्षेत्र में झांकी निकाली जाती है।

हनुमान मंदिर कनॉट प्लेस 
               ज्यादातर यहाँ दोपहर में या रात में जाना हो पाता है पर एक बार यहाँ सुबह 5 बजे जाना हुआ ,जब मेरा जन्मदिन था और मंगलवार था तो सोचा वहां बहुत भिखारी बैठते हैं सुबह सुबह जो ज्यादातर अपाहिज होते हैं ,चलो आज उनको ही कुछ खिला कर अपना जन्मदिन मनाया जाए ,इसलिए मैंने उड़द की दाल बनाई और साथ में 10..12 ब्रेड लेकर वहां उनको वितिरित कर अपना जन्मदिन मनाया | सुबह सुबह की बेला और प्रभु भजनों का साथ हो तो वैसे ही आनंद दोगुना हो जाता है |
       इस मंदिर के प्रधान महंत मदनलाल शर्मा 'बाबाजी' के अनुसार  इतना बड़ा दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर पूरे वर्ल्ड में कहीं नहीं है। बाबाजी के अनुसार इस मंदिर की देखरेख में उनके परिवार की 34 पीढ़ियां सेवा में जुटी हैं। मंदिर में लोगों की सुविधा के लिए लगातार निर्माण किए गए हैं, जिससे इसकी सुंदरता और भव्यता लगातार बढ़ती रही है। उन्होंने कहा कि मंगलवार और शनिवार को इस मंदिर में श्रद्धालुओं की खासी भीड़ रहती है। इन दिनों इनकी संख्या बढ़कर 70 हजार तक पहुंच जाती है। हनुमान जयंती से जुड़े विशेष पर्व पर तो भक्तों की तादाद एक लाख से ऊपर पहुंच जाती है।
        अभी बीते शनिवार को यहाँ सुबह 6 बजे जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ | सूर्य धीरे धीरे अपना तेज बिखेरना शुरू हो रहा था, जब हम घर से निकले बहुत मुद्दतों बाद देखा कुछ लोग सैर करने जा रहे है  कुछ वापिसी पर हैं ,सब दुकानें बंद नजर आई सिर्फ खाने पीने की दुकानों पर हलचल शुरू हो चुकी थी ,सुबह की मस्त हवा का आनंद लेते हुए हम 25 मिनट में ही मंदिर पहुँच गए जहां पहुँचने में कम से कम 40 मिनट तो लगते ही हैं ,सुबह ऐसे लग रहा था दिल्ली में ट्रैफिक की समस्या का ऐसे ही बवाल होता है यहाँ तो कोई समस्या ही नहीं है | वैसे अगर हम मेट्रो से जाते हैं तो 40 मिनट मेट्रो में ,घर से मेट्रो तक और वहां से पैदल का समय मिलाकर लगभग 1 घंटा लग जाता है पर टू व्हीलर पर महज 1 घंटे में हम दर्शन कर वापिस भी आ गए |
इतिहास :-----
दिल्ली का ऐतिहासिक नाम इंद्रप्रस्थ शहर है, जो यमुना नदी के तट पर पांडवों द्वारा महाभारत-काल में बसाया गया था। तब पांडव इंद्रप्रस्थ पर और कौरव हस्तिनापुर पर राज्य करते थे। ये दोनों ही कुरु वंश से निकले थे। हिन्दू मान्यता के अनुसार पांडवों में द्वितीय भीम को हनुमान जी का भाई माना जाता है। दोनों ही वायु-पुत्र कहे जाते हैं। इंद्रप्रस्थ की स्थापना के समय पांडवों ने इस शहर में पांच हनुमान मंदिरों की स्थापना की थी। ये मंदिर उन्हीं पांच में से एक है।
चित्र:Idol of Baby Hanuman facing south in Connaught Place temple.JPG
बाल हनुमान की स्वयंभू प्रतिमा 
                  मान्यता अनुसार प्रसिद्ध भक्तिकालीन संत तुलसीदास जी ने दिल्ली यात्रा के समय इस मंदिर में भी दर्शन किये थे। तभी उन्होंने इस स्थल पर ही हनुमान चालीसा की रचना की थी। तभी मुगल सम्राट ने उन्हें अपने दरबार में कोई चमत्कार दिखाने का निवेदन किया। तब तुलसीदास जी ने हनुमान जी की कृपा से सम्राट को संतुष्ट किया। सम्राट ने प्रसन्न होकर इस मंदिर के शिखर पर इस्लामी चंद्रमा सहित किरीट कलश समर्पित किया। इस कारण ही अनेक मुस्लिम आक्रमणों के बावजूद किसी मुस्लिम आक्रमणकारी ने इस इस्लामी चंद्रमा के मान को रखते हुए कभी भी इस मंदिर पर हमला नहीं किया।
मंदिर की वेब साईट :----
मंदिर की वेबसाइट 16 अक्तूबर ,2010 में बनाई गई और इसका शुभ आरम्भ 17 अक्तूबर ,2010 को दशहरे वाले दिन किया गया इसके अनुसार इसका इतिहास ...
ऐतिहासिक संदर्भों के साथ-साथ इस मंदिर से सर्वधर्म समभाव और सांप्रदायिक एकता की कई मिसालें भी इस मंदिर के साथ जुड़ी हुई हैं. कहा जाता है कि मुगल बादशाह अकबर को जब काफी समय तक पुत्र प्राप्ति नहीं हुई तब वे कनाट प्लेस के इस मंदिर में आए और पूरी आस्था के साथ पुत्ररत्न की कामना की । और अंतत बजरंग बली की कृपा से सलीम के रूप में उनकी मुराद पूरी हुई. सौहार्द्र की मिसाल के तौर पर मंदिर के विमान पर आज भी ओम अथवा कलश के स्थान पर चांद का चिन्ह अवस्थित है. इस मंदिर की तमाम विशेषताओं में सबसे उल्लेखनीय तथ्य यह है कि ये हनुमानजी के बाल्यकाल को दर्शाने वाले देश का सबसे प्रमुख मंदिर है। यहां बाल हनुमान के एक हाथ में खिलौना और दूसरा हाथ उनके सीने पर है.  ये महावली वीरवर बजरंगबली का ही प्रताप है कि इस मंदिर में 1 अगस्त 1964 से आज तक लगातार श्री राम जयराम जय जय राम का जाप जारी है. जिसके लिए इसे गिनीज बुक में भी शामिल किया गया है।
चित्र:Crescent on Spire of Hanuman Temple, Connaught Place.JPG
शिखर पर चन्द्रमा सहित किरीट कलश 
वर्तमान इमारत आंबेर के महाराजा मान सिंह प्रथम (1540-1614) ने मुगल सम्राट अकबर के शासन काल में बनवायी थी। इसका विस्तार महाराजा जयसिंह द्वितीय (1688-1743) ने जंतर मंतर के साथ ही करवाया था। दोनों इमारतें निकट ही स्थित हैं। इसके बाद भी इमारत में समय समय पर कुछ कुछ सुधार, बदलाव आदि होते रहे। इस मंदिर का विशेष आकर्षण यहां होने वाले 24-घंटे का अटूट मंत्र जाप है। ये जाप "श्रीराम जय राम, जय जय राम॥" मंत्र का होता है, और यह 1अगस्त, 1964 से अनवरत चलता आ रहा है। बताया जाता है, कि ये विश्व का सबसे लंबा जाप है और इसकी रिकॉर्डिंग गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी अंकित है।[ लगभग 20 वर्ष से इससे जुड़ी हुई हूँ दो बार इस मंदिर का चलिया कर चुकी हूँ ,इसलिए जाप होते क्योंकि कभी दिखा नहीं है इसलिए इसकी पुष्टि हेतु वहां गद्दी पर बैठे महंत जी से इस जाप के बारे में पूछा तो उन्होंने इससे इन्कार किया कि ऐसा कोई जाप यहाँ नहीं होता है ]
प्रवेश द्वार :----
शिल्पकला की दृष्टि भी ये मंदिर बेहद उत्कृष्ट कोटि का है. इसके मुख्य द्वार का वास्तुशिल्प रामायण में वर्णित कला के अनुरूप है. मुख्य द्वार के स्तंभों पर संपूर्ण सुंदरकांड की चौपाइयां खुदी हुई हैं. ऐसा माना जाता है कि रामचरित मानस जैसा ऐतिहासिक धर्मग्रंथ लिखने वाले गोस्वामी तुलसीदास 16वीं सदी में जब दिल्ली आए तब वे इस मंदिर में भी दर्शन को आए थे. कहा जाता है कि यही वो पवित्र स्थान है जहां से उन्हें 40 चौपाइयों की हनुमान चालीसा लिखने की प्रेरणा मिली |


मंदिर का प्रवेश द्वार 

मंदिर में प्रवेश करते ही सामने दिवार पर चारों तरफ हनुमान चालीसा संकटमोचन ,आरती और हनुमान एवं श्रीराम की प्रतिमाएं अंकित हैं बाये तरफ तुलसीदास जी की प्रतिमा लगाई गई है ,इसके साथ ही लक्ष्मी पूजन दरबार ,गणेश प्रतिमा भी स्थापित हैं।अब सरस्वती माँ और गायत्री माँ की मूर्ति भी स्थापित की गई है |प्रवेश करते ही सामने पंचमुखी हनुमान दरबार के साथ साथ संतोषी माँ की बहुत बड़ी प्रतिमा विराजमान है,जिसके आगे निरंतर ज्योति जलती रहती है यहाँ से परिक्रमा करते हुए पहुंचते हैं शिवालय में यहाँ शिव प्रतिमा के इलावा शिव पंचायत, साई बाबा की प्रतिमा विराजमान है यहाँ से बाहर आते ही मंदिर में एक समाधि है। महंत बाबाजी ने बताया कि यह समाधि महंत ध्यानचंद शर्मा की है, जिन्होंने वर्ष 1742 में यह समाधि ली थी।


शनिवार, 29 जून 2013

प्रभु सुन लो

प्रभु सुनो मेरी विनती नादान जान के 
मैं तो आया तेरे द्वारे मेहरबान जान के

शनिवार, 15 जून 2013

बांके बिहारी! ए गिरिधारी! मेरी बारी कहाँ गए ?





अखियाँ तरसें दर्श को तेरे, कुंजबिहारी कहाँ गये?
 बाँके बिहारी, ए गिरिधारी ,मेरी बारी कहाँ गये?

द्वारका गलियाँ,तुझ बिन सूनी, श्याम न्यारे कहाँ गये?
 बाँके बिहारी, ए गिरिधारी ,मेरी बारी कहाँ गये?






 गोकुल की गैया,बलराम पुकारे, नंद दुलारे कहाँ गये?
 बाँके बिहारी, ए गिरिधारी ,मेरी बारी कहाँ गये?

वृंधावन पूछे, राधा पुकारे,ए मोहन प्यारे कहाँ गये?
 बाँके बिहारी, ए गिरिधारी ,मेरी बारी कहाँ गये?






अर्जुन व्याकुल सारथी के बिन,पार्थ के प्यारे कहाँ गये?
 बाँके बिहारी, ए गिरिधारी ,मेरी बारी कहाँ गये?

कलयुग आया,अनर्थ है लाया,सबके सहारे कहाँ गये?
 बाँके बिहारी, ए गिरिधारी ,मेरी बारी कहाँ गये ??

रविवार, 26 मई 2013

'तोरी कृष्णा प्रीत मोहे भांवरी बनाए रे'




तोरी कृष्णा प्रीत मोहे भांवरी बनाए रे
चैन ना आए मोहे चैन ना आए रे

सब जग रूठा , सब बंधन झूठा
तू ही मुझे घड़ी घड़ी अपना बनाए रे

तोरी कृष्णा प्रीत मोहे भांवरी बनाए रे
चैन ना आए मोहे चैन ना आए रे

रिश्ते काहे के , नाते काहे के
तुझसे ही नाता मेरा जुड़ता जाए रे

तोरी कृष्णा प्रीत मोहे भांवरी बनाए रे
चैन ना आए मोहे चैन ना आए रे

राधा सी प्रीत दे दे,मीरा सी दीवानगी
तेरा ही रंग मोह पे चढ़ता जाए रे

तोरी कृष्णा प्रीत मोहे भांवरी बनाए रे
चैन ना आए मोहे चैन ना आए रे

गुरुवार, 9 मई 2013

मेरे कन्हैया



नटखट था बचपन,
जवानी थी संजीदा!
सब कुछ संभाला,
चाहे कितना पेचीदा!
लग्न राधा जैसी,
अगर उससे लगा लो!
कुछ नहीं नामुमकिन,
जो चाहो तुम पा लो!

सबकी वो बिन माँगे,
खाली झोली भरता!
सुखों का वोह दाता,
दुखों को है हरता!
दुखियारे भक्तों की,
पार करो तुम नैया!
ओ मेरे साँवरिया,
ओ मेरे कन्हैया!! .

शुक्रवार, 26 अप्रैल 2013

'......प्रार्थना......''


          फाल्गुन की फुहार,
          अपनों का दुलार,
          प्रीतम का प्यार,
          रंगों का त्यौहार!


          आए तेरे दरबार,
          उमंग लिए हज़ार,
          पूरी करो करतार,
          दुख हरो विघ्नहार!


          विनती करो स्वीकार,
          तुझ पर मैं निसार,
          हम सबके पालनहार
          खुशियाँ देना अपार!


           तेरी महिमा अपरंपार,
           भरो मेरे भंडार,
           भूलों के बक्ष्नहार,
           सुखी रहे परिवार!


           हे दीनों के नाथ,
           सिर पर रखना हाथ,
           मेरा देना सदा साथ
           तुझ बिन मैं अनाथ!!

.
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...