सोमवार, 6 जून 2016

सिंगापुर यात्रा संस्मरण भाग 1.

परियों के शहर सिंगापुर में 

यात्रा करना एक शौक के इलावा मुझे उत्साहित करता है वहां की अलग भाषा ,संस्कृति ,परिवेश ,आबो हवा, को पास से महसूस करने के लिए ... विदेश की वनस्पति ,मौसम, बोल चाल ,रहन सहन ,उनकी सोच किस तरह से अलग है अपने देश से ,मुझे प्रेरित करते हैं कुछ लिखने के लिए इसलिए आपके समक्ष है मेरा सिंगापुर यात्रा संस्मरण ... 
जैसा कि हम लोग अक्सर बोलते हैं की दाने दाने पर लिखा है खाने वाले का नाम .. यह दाने हमें कहाँ से कहाँ तक ले जायें और कब बिना किसी पूर्व नियोजित कार्यक्रम के ले जायें कहना मुश्किल है .. ऐसा ही कुछ मेरे साथ भी हुआ ..रात में लगभग 11.30 बजे मैं सो चुकी थी तभी बेटे ने मोबाइल पकड़ाते हुए कहा बात करो और दूसरी तरफ से आवाज आई सिंगापुर चलना है मैंने भी आधे नींद में ही पूछ डाला कब ?
11 को .. 11 मई से 16 मई तक ... नहीं ..नहीं जा सकती सोनी का पहला पेपर है 12 को .. उसे अकेला छोड़ना ठीक नहीं ... [सोनी मेरा लाडला जो बी.कॉम. के पेपर दे रहा है ] यह कह कर मैं दोबारा सो गई ... सुबह डैडी जब काम पर चले गए तो उनका फ़ोन आया जा क्यों नहीं रही ..चली जा .. फिर बड़े बेटे का फ़ोन आ गया ..जाओ जाओ ...सोनी कर लेगा पेपर की तैयारी ... मैंने भी हाँ कर दी .. अगले दिन हमारी टिकट हो चुकी थी ... बचपन में ज्योतिषी को हाथ दिखाकर अक्सर पूछा जाता था ..विदेश जाने का संयोग है ... वो आज पूरा होने वाला था ... ..

      मैं सरिता भाटिया दिल्ली से हूँ ..आइये दोस्तों आप को भी ले चलूँ अपनी पहली विदेश यात्रा पर ...मेरे सपनों का शहर ...सिंगापुर... कुछ खट्टे और ज्यादा मीठे अनुभवों के साथ .... 
सिंगापुर 
सिंगापुर दक्षिण एशिया में इंडोनेशिया और मलेशिया के बीच स्थित एक आधुनिक ,संपन्न,आत्मनिर्भर ,अनुशासित, विकसित ,सर्व सुविधा युक्त बहुत से धर्मों ,संस्कृतियों ,भाषाओँ को एक जुट समेटे एक स्वतंत्र लेकिन महँगा शहर है ...यह 1965 में मलेशिया से अलग होकर एक स्वतंत्र राष्ट्र बना ....ऐसा कहा जाता है कि सुमात्रा का राजकुमार यहाँ शिकार के लिए आया तो उसने यहाँ सिंहों को देखकर इसका नाम रखा सिंहों का पुर यानि सिंगापुरा  ..जो बाद में सिंगापुर कहलाया ..  सिंह यहाँ का मुख्य प्रतीक भी है जिसे यहाँ पर मर्लियोन कहा जाता है ...सिंगापुर विश्व की प्रमुख बंदरगाहों में से एक और एक प्रमुख  व्यापारिक केंद्र भी है ..इसे प्रकृति का वरदान प्राप्त है यहाँ अपार सम्पदा है .. भारतीय यहाँ कई कारणों से खिंचे चले आते हैं ..सबसे पहले तो यह भारत के नजदीक है ,यहाँ भारतीय आबादी भी काफी है ,यहाँ मुख्य चीनी और अंग्रेजी भाषा बोली जाती है ...इसलिए बातचीत में आसानी रहती है ... सबसे ज्यादा यहाँ चीनी जनसंखया है, 8%यहाँ  भारतीय रहते हैं .. ....सिंगापुर को सपनों का रोशनियों का शहर कहें तो अतिश्योक्ति नहीं होगी.....  




पहली विदेश यात्रा में बहुत सारी बातें ऐसी होती हैं जिनका उल्लेख किसी गाइड बुक में आपको नहीं मिलेगा आइये नजर डालते हैं कुछ जरूरी प्रक्रियाओं पर  ..विदेश जाने से पहले जिनका जानना  बहुत जरूरी है ...

पासपोर्ट :--तो जनाब सबसे पहले विदेश जाने के लिए आपके पास होना चाहिए पासपोर्ट जिसके बनाने की प्रक्रिया  अब काफी सरल है सब कुछ आजकल ऑनलाइन हो जाता है .. आपका फॉर्म ऑनलाइन ही भरा जाता है  और साथ ही आपकी सुविधा अनुसार पासपोर्ट ऑफिस जाने की तिथि निर्धारित हो जाती है ... आप निश्चित तिथि पर वहां जाकर  सब औपचारिकतायें पूरी कर सकते हैं ...इसके बाद घर पर आकर एक ऑफिसर आपकी इन्क्वायरी  करता है .. किन्हीं दो पड़ोसियों के आई डी की फोटोकॉपी और फॉर्म पर उनके हस्ताक्षर लेकर वो चला जाता है ..   सब होने के बाद आपका पासपोर्ट आपके घर आ जाता है लगभग एक महीने के अंदर ... पासपोर्ट पहले से आपके पास होना चाहिए और उसकी समय सीमा 6 महीने तक वैलिड होनी चाहिए ...

वीजा :-- वीजा कानून हर देश के अलग हैं इसलिए उसके अनुसार ही चलें कुछ वहां पहुँचने पर आपको एअरपोर्ट पर वीजा देते हैं .. कुछ का यहीं से वीजा लगवाकर जाना पड़ता है .. सिंगापुर के वीजा के लिए ऑनलाइन अप्लाई  करने के बाद तीन वर्किंग डेज  में वीजा मिल जाता है और यह  इ -वीजा ही मिलता है ..इसलिए वीजा के लिए हमने एजेंट को पकड़ा क्योंकि हमारे पास समय कम था ... और उसे आगे लिखे जरूरी कागजात दिए ... 

*एक फोटो  जोकि 80% जूम की गई हो और पूरा चेहरा नजर आ रहा हो , पीछे वाइट बैकग्राउंड ,मैट फिनिश के साथ ... ,
*इ -टिकट की फोटोकॉपी ,
*वास्तविक पासपोर्ट ..साथ में उचित पन्नों की फोटोकॉपी संलग्न करें 
*आपकी आखिरी तीन महीने की बैंक स्टेटमेंट ,जिसमें 50,000 रुपये तक की राशि होनी चाहिए .. 
अगर आपके जरुरी कागज़ अंग्रेजी भाषा में नहीं हैं तो उनका अनुवाद साथ में संलग्न होगा .. 
और सबसे जरुरी जिसके बिना कोई भी आगे नहीं बढता ..वीजा फीस जोकि लगभग 30 डॉलर है यानि 1500 रुपये और एजेंट अपनी कमीशन लेगा वो अलग 500 से ऊपर कुछ भी .... 
कुछेक में अगर किसी कम्पनी का इंट्रोडक्शन लैटर उनकी अनुमति के साथ संलग्न कर दें तो वीजा मिलना और आसान हो जाता है ...  

पासपोर्ट हमारा पहले से तैयार था 
वीजा 9 को मिल चुका था ..अब हमें रूपयों को सिंगापुर डॉलर में बदलवाना था ..और कुछ शॉपिंग करके पैकिंग करनी थी ...

करेंसी यानि मुद्रा :-- यह बहुत ही खेद की बात है कि हम रूपयों को यानि भारतीय मुद्रा को विदेश में जाकर डॉलर में बदलवा नहीं सकते ..इसलिए सिंगापुर डॉलर के इलावा हमें रुपये को यू एस डॉलर में बदलवाना पड़ा ..इसका बिल लेकर साथ रखना नहीं भूलें ..   

हमारी 11 मई की सुबह 9.40 की फ्लाइट थी .. विदेश जाने के लिए हमें उड़ान से लगभग 3 घंटे पहले जाना पड़ता है ताकि हम आसानी से सब प्रक्रियाओं से गुजर सकें .... हम 6.30 बजे घर से निकल गए थे ... जैसा की पूर्व विदित था कि इंदिरा गाँधी अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल 3 पर हमें जाना था ,जोकि अब सभी सुविधायों से सुसज्जित हो चुका है ...यहाँ से आप अपनी उड़ान की पूर्व सूचना ले सकते हैं  ... 
मन में एक ख़ुशी मिश्रित बेचेनी थी अब तक गेट तक छोड़ने तो बहुत बार आये थे आज पहली बार विदेश के लिए जा रहे थे ..वहां हम जब गाड़ी से उतरें तो पास ही सड़क पर बहुत ट्राली खड़ी रहती हैं उसमें सामान रखकर घर वालों से विदा लेकर हम गेट नंबर 5 के सामने पंक्ति में खड़े हो गए थे ... हमने अपनी टिकट ,पासपोर्ट ,वीजा हाथ में ले लिया था ताकि लम्बी पंक्तियों से बचा जा सके .. यहाँ आपके डाक्यूमेंट्स का निरिक्षण किया जाता है और अंदर भेज दिया जाता है ..

बोर्डिंग पास :--उसके बाद हम जेट एयरवेज की अतर्राष्ट्रीय उड़ान के काउंटर पर चले गए यहाँ हमारा सामान जिसे लगेज कहा जाता है ले लिया गया  ..जिसका भार उचित होना चाहिए ... और हमें बोर्डिंग पास यानि हमारी टिकट दे दी गई  जिस पर नाम के साथ .. कहाँ से कहाँ जा रहे हैं उड़ान संख्या ,उड़ान का समय रहता है ..इस पर ही हमारे लगेज की एक स्लिप लगा दी गई जिससे हम उतरने के बाद अपना सामान ले सकते हैं  .. अब हम चेक इन कर चुके थे ... चेक इन यानि सूचना देना की हम एअरपोर्ट पर आ चुके हैं  ...बाकी जितने बैग थे कैमरा वगेरह हमने हाथ में ले लिए थे जिन्हें हम हैण्ड कैरी के नाम से जानते हैं  .. सामान को घर पर ही हमने तोल लिया था इसलिए कोई दिक्कत नहीं थी .... 

इमीग्रेशन :-- विदेश जाने के लिए एक इमीग्रेशन फॉर्म भरना होता है जो हमने वहीं से लिया और भर दिया ... उसमे वैसे ही नाम भरना होता है जैसे आपके पासपोर्ट में हो जैसे भाटिया सरिता .. फ्लाइट नंबर .. फ्लाइट का समय .. तिथि.. आपका पता ... वगेरह  ...
इसे भरकर बहुत सारे काउंटर होते हैं .. उनके सामने किसी भी पंक्ति में खड़े हो जाइये अपनी बारी का इंतज़ार कीजिये वो आपसे साथ साथ कुछ प्रश्न पूछते रहते हैं कहाँ जा रहे हो ? क्यों जा रहे हो ? किसके पास जा रहे हो ? पहली बार जा रहे हो ... वगेरह वगेरह ..घबराएँ नहीं ..आराम से जवाब दें .. वहां आपके पासपोर्ट पर स्टेम्प यानि ठप्पा लगा दिया जाता है ... 
ठप्पा लगने के बाद मन में एक अद्भुत ख़ुशी और राहत को हमने महसूस किया जैसे पप्पू पास हो गया हो ...  
आखिरी चेकिंग :--
यहाँ से निकलने के बाद आप की विमान पर जाने से पहले अंतिम और पूर्णतया चेकिंग होती है जो मेटल डिटेक्टर के साथ की जाती है ...पुरुष अलग पंक्ति में और महिलायें अलग पंक्ति में  ..जो भी सामान हाथ में है फ़ोन ,पर्स ,लैपटॉप वगेरह उसे एक ट्रे में डाल कर एक्स रे मशीन में से निकाला जाता है .. एक विशेष बात का ध्यान इसमें रखें कोई भी तरल पदार्थ या कुछ भी नुकीला रेजर या कैंची वगेरह आप हैण्ड कैरी में नहीं ले जा सकते इसलिए इसे पहले से ही लगेज में रखें ...इसके बाद आप फ्री हैं कुछ खान पान करना हो तो कर सकते हैं ........
  
हमारी चेकिंग के बाद अब हम बिलकुल फ्री थे ... बोर्डिंग लगभग एक घंटा पहले शुरू होनी थी  .. क्योंकि सुबह के घर से निकले थे कुछ भी खाया नहीं था इसलिए हमने कुछ खान पान किया कुछ फोटो खींचे और अंदर बनी दुकानों पर विंडो शौपिंग की .. इसके बाद अपने हैण्ड बैगज के साथ हम बोर्डिंग एरिया में जाकर बैठ गए .... 

निर्धारित समय पर हमारी फ्लाइट की बोर्डिंग शुरू होने की अनाउंसमेंट हो चुकी थी .. विमान में सबसे पहले प्रीमियर क्लास ,बिज़नेस क्लास और फिर इकॉनमी क्लास के यात्रियों को बैठने के लिए आमंत्रित किया जाता है .. 
हम अब एक गलीनुमा गैलरी में प्रवेश कर गए थे जो विमान में जाकर ही समाप्त हो रही थी ..गेट पर दो परिचारिकाओं [ एयर होस्टेस ] ने जो पीले रंग की मिड्डी पहने हुए थीं हमारा बोर्डिंग पास देखकर हमारी सीट किधर है बता दिया था ... हम अपना सीट नंबर देखकर उस पर विराजमान हो चुके थे .... और जो भी हैण्ड कैरी थे उनको हमारी सीट के ऊपर बने बॉक्स में रख दिया था ... 
हर सीट के सामने दूसरी सीट के पीछे जैसे की एक एक स्क्रीन लगी हुई थी उसी में अटैच रिमोट था और एक फोल्डिंग टेबल था ... उस पर आप अपनी मनपसंद फ़िल्में देख सकते हैं गाने सुन सकते हैं ... या कुछ भी और अपना काम कर सकते हैं ... 
हमने भी उस पर अपनी अपनी पसंद के प्रोग्राम लगा लिए थे .. तभी स्क्रीन पर ही पायलेट ने अपना और अपने साथी का नाम अनाउंस करके सब यात्रियों का स्वागत किया और अपनी सीट बेल्ट बाँधने का निर्देश दिया ..और सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बंद करने के लिए कहा गया ... साथ ही जरूरी हिदायतों की उद्घोषणा हो रही थी जोकि सामने बैग में एक पुस्तिका के रूप में भी थी जिनको पढने के लिए कहा गया ... हमने सीट बेल्ट बाँध कर अपनी सीट सीधी कर ली थी और मोबाइल को फ्लाइट मोड पर कर दिया था ... कुछ ही देर में विमान रन वे पर भाग रहा था ... और फिर एक झटके से हवा में था ... सामने स्क्रीन पर उसकी उंचाई के बारे में मीटर और फीट में बताया जा रहा था ... भारतीय समय .. कितने घंटे की फ्लाइट है और सिंगापुर का समय .. वो सब स्क्रीन पर आ रहा था .. कुछ ही देर में हम बादलों में थे .. लगभग 42,000 फीट की ऊँचाई पर ... साथ साथ हमने अपने मोबाइल में और कैमरे में बाहर के दृश्यों को कैद कर लिया था ..... 
अब विमान सुरक्षित अपनी उड़ान पर था .. सुबह के कोई 10 बजे का समय था ...थोड़ी ही देर में परिचारिकाएँ यानि हवाई वेटर ... दो तीन तरह के जूस ,शराब के साथ चिप्स लेकर आ गई थी ,सबको उनकी जरुरत अनुसार दे रहीं थी ,हम भी फिल्म देखते हुए जूस की चुस्कियां ले रहे थे ... थोड़ी  देर बाद ही खाना लेकर आ गए थे जिसमे एक पैक में चावल थे उसके ऊपर ही एक दाल और एक सब्जी डाली गई थी ,एक पैक्ड दही , पानी की छोटी बोतल और साथ ही चाय के लिए कप ,और चाय बनाने के पाउच थे ... खाना तो स्वादहीन ही होता है ..हॉस्पिटल का इससे अच्छा होता है ... जैसे तैसे हमने खाना निगल लिया था .. परिचारिकाएँ खाली पैक ले गई थी और चाय के लिए गर्म पानी दे रही थी जिसको भी चाय पीनी हो ... इसके बाद कुछ लोग आराम फरमा रहे थे ..कुछ मेरे जैसे जिनको नींद नही आ रही थी वो फिल्म में अपना समय बिता रहे थे ... सबकी सीट पर एक एक शाल था जो ठण्ड लगने पर आप प्रयोग में ला सकते हैं ... समय भी पंख लगा कर उड़ रहा था जैसे जैसे हम सिंगापुर की ओर बढ़ रहे थे बेचैनी और उत्सुकता बढ़ रही थी ... आखिर वो समय आ ही गया उद्घोषणा हो चुकी थी हम लैंड करने वाले हैं कुर्सी की पेटी बाँधने का निर्देश हो चुका था ..और फिर हम रन वे पर भागते हुए अपने गंतव्य पर पहुँच चुके थे ... विमान से बाहर आकर हम भी काफी लम्बा रास्ता तय कर के चांगी एअरपोर्ट को उत्सुकता से देख रहे थे ...  



   
क्रमशः भाग 2...  
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