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बुधवार, 27 अगस्त 2014

शिमला यात्रा वृतांत भाग 3.

भाग 2.
चौथा दिन 
       सुबह लगभग 9.30 बजे हम सब कुछ हल्का फुल्का नाश्ता लेकर होटल छोड़ कर निकल गए | हमने अपना सामान वहीँ छोड़ दिया था ,बाद में ले जाने के लिए | हमारी कालका से शाम 5.40 की गाड़ी थी और अभी हमें वापिस जाने के लिए टैक्सी करनी थी इसलिए हमने जो टैक्सी वाले घूम रहे थे रिज पर उनसे पूछना शुरू किया और एक से बात हो गई कि वो एक बजे हमारे पास पहुँच जायेगा तो इसके बाद हमने खाना खाने की और थोड़ा तिब्बती बाजार घूमने की सोची | हम वहां से जल्दी वापिस आ गए और पता चला टैक्सी वाले को अभी देर लगने वाली थी इसलिए हमने दूसरी टैक्सी लेने की सोची | दो लोग होटल से सामान लेने चले गए | और भूषण जी टैक्सी का पता करने लगे | तिब्बती बाजार के नीचे की तरफ जो टैक्सी स्टैंड था वहां कोई टैक्सी मिल नहीं रही थी,फिर दूसरे टैक्सी स्टैंड से बहुत मुश्किल से हमें 2 बजे तक एक टैक्सी मिल पाई ,जो कालका हमें छोड़ने के लिए तैयार हुई | आखिर हम सबने टैक्सी में बैठकर चैन की साँस ली |
               टैक्सी लगभग 3 से 3.30 घंटे में शिमला से कालका पहुंचा देती है | 2000 रुपये से लेकर 2,500 रुपये तक में बड़ी टैक्सी मिल जाती है हमें सही ड्राईवर और टैक्सी मिल गई थी उसने हमें 3..4 किलोमीटर पहले एक और टैक्सी में शिफ्ट कर दिया ,क्योंकि उसके बाद वो टैक्सी आगे नहीं जा सकती थी शायद कुछ टैक्स का चक्कर था | लगभग 3 घंटे में टैक्सी ने कालका स्टेशन पर पहुँचा दिया था | 
        हम सब वहां गाड़ी का इंतजार करने लगे और तय समय पर गाड़ी आ गई और हम उसमे सवार हो गए | वोही शताब्दी गाड़ी जिसके चलते ही पहले चाय आ जाती है ,फिर 8 बजे खाना बंटना शुरू हो चूका था और आइस क्रीम | लेकिन इतनी जल्दी सब खाना खाने को तैयार नहीं थे इसलिए उन्होंने खाना वापिस भिजवा दिया ,लेकिन वो खाना पैक करके भी दे रहे थे जो ले जाना चाहे अपना खाना | हम 10.15 बजे तक दिल्ली पहुँच गए थे | वहां से हमने मेट्रो ली और 11 बजे तक घर पहुँच गए |
              आइये अब जाने शिमला के बारे में कुछ और ज्यादा यहाँ हम नहीं जा पाये .....
शिमला की खासियत :-

संस्कृति
शिमला में विभिन्न त्योहारों को मनाया जाता है। शिमला समर फेस्टिवल, पीक पर्यटन सीजन के दौरान हर साल रिज पर आयोजित किया जाता है। इसका मुख्य आकर्षण सभी देश भर से लोकप्रिय गायकों द्वारा प्रदर्शन शामिल है।

कृषि और उद्योग
शिमला एक कृषि बाज़ार है और यहाँ मद्यनिर्माण, हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योग जैसे लघु उद्योग हैं।

शिक्षा
शिमला में अनेक पुराने आरोग्यगृह, महाविद्यालय और हिमालय प्रदेश विश्वविद्यालय भी है।
1972-73 में पुनर्गठन के समय शिमला ज़िले (5,000 वर्ग किमी) का विस्तार किया गया था।
शिमला में 14 आंगनबाड़ी और 63 प्राथमिक विद्यालय है। कई ब्रिटिश युग के स्कूल भी हैं।
शिमला में लोकप्रिय स्कूलों में बिशप कॉटन स्कूल, शिमला पब्लिक स्कूल, सेंट एडवर्ड स्कूल, तारा हॉल, डीएवी स्कूल, डीएवी न्यू शिमला, दयानंद पब्लिक स्कूल, ऑकलैंड स्कूल, लालपानी स्कूल प्रमुख हैं।
केन्द्रीय विद्यालय, शिमला के बेहतरीन स्कूलों में से एक है। पहले यह हरकोर्ट बटलर स्कूल के नाम से जाना जाता था।

शिमला में मेडिकल संस्थानों में इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज और दंत चिकित्सा महाविद्यालय हैं।

दर्शनीय स्थल :---
शिमला में और उसके आसपास बहुत सारे दर्शनीय स्थल हैं ,जिनका आप पूरा आनंद सर्दिओं में ले सकते हैं |

रिज
शहर के मध्य में एक बड़ा और खुला स्थान, जहां से पर्वत श्रंखलाओं का सुंदर दृश्य देखा जा सकता है। यहां शिमला की पहचान बन चुका न्यू-गॉथिक वास्तुकला का उदाहरण क्राइस्ट चर्च और न्यू-ट्यूडर पुस्तकालय का भवन दर्शनीय है।

मॉल
शिमला का मुख्य शॉपिंग सेंटर, जहां रेस्तरां भी हैं। गेयटी थियेटर, जो पुराने ब्रिटिश थियेटर का ही रूप है, अब सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र है। कार्ट रोड से मॉल के लिए हि.प्र.प.वि.नि. की लिफ्ट से भी जाया जा सकता है। रिज के समीप स्थित लक्कड़ बाजार, लकड़ी से बनी वस्तुओं और स्मृति-चिह्नों के लिए प्रसिद्ध है।

काली बाड़ी मंदिर
यह मंदिर स्कैंडल प्वाइंट से जनरल पोस्ट ऑफिस से की ओर कुछ गज की दूरी पर स्थित है। माना जाता है कि यहां श्यामला देवी की मूर्ति स्थापित है।


शिमला तस्वीरें - काली बारी मंदिर - मंदिर का दृश्य


जाखू मंदिर
(2.5 कि.मी.) 2455 मी. : शिमला की सबसे ऊंची चोटी से शहर का सुंदर नजारा देखा जा सकता है। यहां "भगवान हनुमान" का प्राचीन मंदिर है। 
कैसे पहुँचें 
रिज पर बने चर्च के पास से पैदल मार्ग के अलावा मंदिर तक जाने के लिए पोनी या टैक्सी द्वारा भी पहुंचा जा सकता है।



जाखू मन्दिर ..यहाँ हनुमान जी की विशालकाय प्रतिमा 108 ऊँची स्थापित है हनुमान जी का यह विरत रूप देखते ही बनता है | 
मान्यता
पौराणिक कथा के अनुसार राम तथा रावण के मध्य हुए युद्ध के दौरान मेघनाद के तीर से भगवान राम के अनुज लक्ष्मण घायल एवं मूर्छित हो गए थे। उस समय सब उपचार निष्फल हो जाने के कारण वैद्यराज सुषेण ने कहा कि अब एक ही उपाय शेष बचा है। हिमालय की संजीवनी बूटी से लक्ष्मण की जान बचायी जा सकती है। इस संकट की घड़ी में रामभक्त हनुमान ने कहा प्रभु मैं संजीवनी लेकर आता हूँ। हनुमानजी हिमालय की और उड़े, रास्ते में उन्होंने नीचे पहाड़ी पर 'याकू' नामक ऋषि को देखा तो वे नीचे पहाड़ी पर उतरे। जिस समय हनुमान पहाड़ी पर उतरे, उस समय पहाड़ी उनका भार सहन न कर सकी। परिणाम स्वरूप पहाड़ी जमीन में धंस गई। मूल पहाड़ी आधी से ज्यादा धरती में समा गई। इस पहाड़ी का नाम 'जाखू' है। यह 'जाखू' नाम ऋषि याकू के नाम पर पड़ा था।

हनुमान ने ऋषि को नमन कर संजीवनी बूटी के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की तथा ऋषि को वचन दिया कि संजीवनी लेकर आते समय ऋषि के आश्रम पर जरूर आएंगे। हनुमान ने रास्ते में 'कालनेमी' नामक राक्षस द्वारा रास्ता रोकने पर युद्ध करके उसे परास्त किया। इस दौड़धूप तथा समयाभाव के कारण हनुमान ऋषि के आश्रम नहीं जा सके। हनुमान याकू ऋषि को नाराज नहीं करना चाहते थे, इस कारण अचानक प्रकट होकर और अपना विग्रह बनाकर अलोप हो गए। ऋषि याकू ने हनुमान की स्मृति में मंदिर का निर्माण करवाया। मंदिर में जहां हनुमानजी ने अपने चरण रखे थे, उन चरणों को संगमरमर पत्थर से बनवाकर रखा गया है। ऋषि ने वरदान दिया कि बंदरों के देवता हनुमान जब तक यह पहाड़ी है, लोगों द्वारा पूजे जाएंगे।



चैल 
चैल कभी पटियाला के महाराजा की गर्मियों की राजधानी होती थी। यह शिमला से 43 किमी दूर है। यहां विश्व में सबसे ऊंचाई पर स्थित क्रिकेट पिच और पोलो ग्राउंड भी है।
यह जगह लोगों में पिकनिक स्पॉट के रूप में भी काफी लोकप्रिय है। छुट्टी मनाने के लिए आने वाले लोगों के बीच में चैल सेंचुरी काफी प्रसिद्ध है। यहां आप कई जंगली पशुओं को देख सकते हैं। सिद्ध बाबा का मंदिर लोगों के आकर्षण का केंद्र है।

कैसे पहुंचें: चैल तक बस या टैक्सी के जरिए पहुंचा जा सकता है।

कहां ठहरें: चैल में ठहरने का खर्च शिमला में ठहरने की अपेक्षा काफी कम खर्च आएगा। यहां फाइव स्टार होटल तो नहीं मिलेंगे, लेकिन यहां कई अच्छे और सस्ते होटल अवश्य उपलब्ध हैं। यहां आप चार हजार रुपए में आराम से रह सकते हैं।

नारकंडा
यह शिमला से 64 किमी दूर है। यह जगह गर्मियों में अपने एडवेंचर और ट्रैकिंग के लिए प्रसिद्ध है। नारकंडा में आप फलों के बगीचे देख सकते हैं। सेब के बगीचे आपको यहां हर जगह मिलेंगे।
कैसे पहुंचे : नारकंडा शिमला से बस या फिर टैक्सी के जरिए पहुंचा सकता है।

राज्य संग्रहालय
(3 कि.मी.): यहां हिमाचल प्रदेश की प्राचीन ऐतिहासिक वास्तुकला और पेंटिंग्स देखे जा सकते हैं। यह संग्रहालय प्रात: 10 बजे से सायं 5 बजे तक खुलता है तथा सोमवार और राजपत्रित अवकाशों में यह बंद रखा जाता है।

इंडियन इंस्टीट्यूट आफ एडवांस्ड स्टडी
(4 कि.मी.) 1983 मी. : अंग्रेजी पुनर्जागरण काल में बना यह शानदार भवन पूर्व वायसराय का आवास हुआ करता था। इसके लॉन और पेड़ यहां की शोभा और बढ़ा देते हैं।


Shimla photos, Viceregal Lodge & Botanical Gardens - A lower angled view

प्रोस्पेक्ट हिल
(5 कि.मी.) 2155 मी. : कामना देवी मंदिर को समर्पित यह हिल शिमला-बिलासपुर मार्ग पर बालुगंज से 15 मिनट की पैदल दूरी पर है। हिल से इस क्षेत्र का विहंगम दृश्य दिखाई देता है।

समर हिल
(7 कि.मी.) 1983 मी. : शिमला-कालका रेलमार्ग पर एक सुंदर स्थान है। यहां के शांत वातावरण में पेड़ों से घिरे रास्ते हैं। अपनी शिमला यात्रा के दौरान राष्ट्पिता महात्मा गांधी राजकुमारी अमृत कौर के शानदार जार्जियन हाउस में रुके थे। यहां हिमाचल प्रदेश विश्वद्यालय है।

चैडविक जलप्रपात
(7 कि.मी.) 1586 मी. : घने जंगलों से घिरा यह स्थान समर हिल चौक से लगभग 45 मिनट की पैदल दूरी पर है।

संकट मोचन
(7 कि.मी.) 1975 मी. : शिमला-कालका सड़क मार्ग पर (रा.राज.-22) पर "भगवान हनुमान" का प्रसिद्ध मंदिर है। यहां से शिमला शहर का सुंदर दृश्य दिखाई देता है। यहां बस/टैक्सी द्वारा पहुंचा जा सकता है।


Shimla photos, Sankat Mochan Temple - Idol of Hanumanji

तारादेवी

(11 कि.मी.) 1851 मी. : शिमला-कालका सड़क मार्ग पर (रा.राज.-22) पर यह पवित्र स्थान के लिए रेल, बस और कार सेवा उपलब्ध है। स्टेशन/सड़क से पैदल अथवा जीप/टैक्सी द्वारा यहां पहुंचा जा सकता है।


Shimla photos, Tara Devi Temple - Tara Devi Temple

नालदेहरा 

नालदेहरा शिमला-तत्तपानी रोड पर शिमला से करीब 25 किमी दूर 6,706 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। देश का सबसे पुराना और सर्वाधिक ऊंचाई पर स्थित गोल्फ कोर्स यही है। यह प्रसिद्ध पिकनिक स्पॉट है। इसके अलावा यह जंगल यात्रा और हॉर्स राइडिग के लिए भी जाना जाता है।

कैसे पहुंचें : नालदेहरा शिमला से 25 किमी दूर स्थित है। यहां आप शिमला से बस या फिर टैक्सी द्वारा पहुंच सकते हैं।


कहां ठहरें : नालदेहरा शिमला से ज्यादा दूर नहीं है। यहां आपको फाइव स्टार होटल तो नहीं मिलेंगे लेकिन छोटे-छोटे होटल यहां जरूर उपलब्ध हैं, जहां आप ठहर सकते हैं।


नालदेहरा तस्वीरें,नालदेहरा गोल्फ कोर्स

कुफरी 
कुफरी, 2743 मीटर की ऊंचाई पर स्थित, शिमला से लगभग 18 किमी की दूरी पर एक छोटा सा शहर है। इस जगह का नाम 'कुफ्र' शब्द से पड़ा है, जिसका स्थानीय भाषा में मतलब है 'झील'। इस जगह के साथ जुड़े आकर्षण के कारण यहाँ वर्ष भर पर्यटक आते हैं। महासू पीक, ग्रेट हिमालयन नेचर पार्क, और फागू कुफरी में कुछ प्रमुख पर्यटन स्थलों में से हैं।


ग्रेट हिमालयन नेचर पार्क पक्षियों और जानवरों की 180 से अधिक प्रजातियों का घर है। फागू , कुफरी से 6 किमी दूरी पर स्थित, शांति प्रेमियों के बीच एक लोकप्रिय गंतव्य है। सुरम्य पर्वत श्रृंखला से घिरा हुआ है, यह गंतव्य एक लोकप्रिय धार्मिक स्थल भी है।
आसपास के कुछ मंदिर अपनी लकड़ी की नक्काशी के लिए जाने जाते रहे हैं। यह जगह लंबी पैदल यात्रा, शिविर और ट्रैकिंग जैसे विभिन्न साहसिक गतिविधियों के लिए भी लोकप्रिय है। कुफरी में अपने प्रवास के दौरान साहसिक उत्साही स्कीइंग, टोबोगैनिंग, गो–कार्टिंग, और घोड़े की सवारी की तरह विभिन्न खेलों का आनंद ले सकते हैं।

कुछ सावधानियां :--
1.पहाड़ी स्थान पर जाने के लिए काफी चलने के लिए जो सक्षम हो वोही शिमला यात्रा का आनंद उठा सकता है | 
2.टॉय ट्रेन में कभी भी नहीं जाएँ ,अगर जरुरी हो तो कुछ खाने का सामान लेकर चलें |
3.जाखू मंदिर जाएँ तो कोई भी पर्स बैग वगेरह ना लेकर जाएँ पर छड़ी ले जाना नहीं भूलें |
4.कुफरी गर्मी या बरसात में कभी नहीं जाएँ जब तक वहां का प्रशासन वहां के रास्ते की सुध नहीं लेता | इसे नेट पर ही निहारें बहुत खूबसूरत लगेगा वर्ना दूर के ढोल सुहावने होते हैं यह जान लें | यहाँ केवल सर्दियों में ही जाएँ तो आपको प्रकृति की गोद का अहसास होगा |
5.मौसम के अनुसार गर्म कपड़े लेकर जाएँ |
6.दर्शनीय स्थल सर्दी में ही देखने जायें ,गर्मी में मौसम का आनंद लें बस,आसपास घुमने नहीं जाएँ |
7.होटल बेशुमार हैं शिमला में ,नेट से थोडा अंदाजा लेकर जाएँ | होटल मॉल रोड या रिज पर लें तो बेहतर रहेगा |
8.अगर ऑफ़ सीजन में जाएँ तो कम पैसों में दोगुना मजा ले सकते हैं |
9.अपनी जरुरी दवाइयाँ लेकर जाएँ ,मिल तो सब कुछ जाता है अगर आप बार बार चल सकते हैं तो |
10.यह प्राकृतिक सम्पदा आपकी अपनी है इसे स्वच्छ रखें |




अलविदा दोस्तों मिलते हैं बहुत जल्दी एक और यात्रा वृतांत के साथ तब तक के लिए मस्त रहें और व्यस्त रहें ....नमस्कार ...

मंगलवार, 26 अगस्त 2014

शिमला यात्रा वृतांत भाग 2.

दूसरा दिन :--
दूसरे दिन सब आराम से उठकर तैयार हुए , खूब बरसात होने लगी थी इसलिए होटल में ही थोडा नाश्ता ले लिया ,वैसे तो शिमला के आसपास घूमने जाने का प्रोग्राम था लेकिन बारिश के कारण 12 बज चुके थे ,इसलिए सब ने यहीं शिमला में ही घूमने का फैसला किया यहाँ तीन रोड लगभग समान्तर चलती हैं सबसे ऊपर रिज रोड ,फिर नीचे माल रोड और उसके नीचे है नीचा बाजार रोड है |   रिज रोड पर लायब्रेरी है और कुछ होटल हैं ,माल रोड पर थाना , नगर निगम दफ्तर है ,फायर स्टेशन है और बहुत सारे होटल ढाबे , दुकानें हैं यह एक खुला बाजार है | 





इसके ठीक नीचे छोटा बाजार है जो दिल्ली के चांदनी चौंक की तरह तंग बाजार है और ये दुकानों से पटा हुआ है ,यहाँ बाकी दुकानों के इलावा कपडे की,जूतों की और किताबों की बहुत दुकानें हैं ,शौपिंग के लिए यह एक परफेक्ट बाजार है |  
यहाँ शॉपिंग करने के बाद और खाना वगेरह खाने के बाद हम घूमते हुए वापिस होटल पहुँच गए | आराम करने के बाद शाम ढलने के साथ ही हम वापिस पहुंचे चौंक पर यहाँ बिलकुल इंडिया गेट जैसा माहौल रहता है काफी चहल पहल थी बच्चे घुड़सवारी का मजा ले रहे थे ,धुंध धीरे धीरे बढ़ने लगी और मौसम सुहावना होता गया , सब लोग वहां मौसम का मजा ले रहे थे | कोई फोटो के पोज़ ले रहा था कोई कुछ खाने का मजा ले रहे थे | वहां लकड़ी से बने बेंच लगे हुए हैं ,यहाँ जब कोई प्रोग्राम वगेरह होता है तो सब इन पर बैठ सकते हैं | ऐसे ही घूमते फिरते ,खाते पीते सब ने खूब मजे किये | 

         इसके ठीक पीछे की तरफ है लक्कड़ बाजार ,यहाँ लकड़ी से बना हुआ सामान मिलता है खासकर यह बाजार स्मृति चिन्हों के लिए प्रसिद्ध है यहाँ से आप शिमला के उपहार खरीद कर ले जा सकते हैं भेंट स्वरुप देने के लिए | कुछ कपड़े की भी यहाँ दुकानें हैं शिमला में ज्यादा दुकानें सरदार चलाते हैं क्योंकि यह चंडीगढ़ के पास है |
            हम लोग खरीदारी करके फिर वापिस होटल पहुँच गए और थोड़ा आराम करने के बाद रात को वापिस निकले भोजन करने के लिए ,यहाँ पर आपके लिए बहुत सारे आप्शन हैं जो खाना चाहें ,जैसा खाना खाना चाहें,एक तरफ ढाबे का खाना है तो एक तरफ अच्छे अच्छे रेसटोरेंट भी हैं ,सागर रत्ना भी यहाँ मौजूद है | बालूजी में खाना खाने के बाद हम वापिस होटल आ गए | 
तीसरा दिन :--
आज मौसम बहुत साफ़ था कोई बारिश नहीं और हमने प्रोग्राम बनाया जाखू मंदिर जाने का ,वो भी सुबह सुबह ताकि हम बच्चों के उठने से पहले होकर वापिस आ जाएँ क्योंकि बच्चों का मंदिर जाने का कोई विचार नहीं था | इसलिए हम पांच लोग जाखू मंदिर के लिए निकले |
जाखू मंदिर जाने के लिए 
1.एक तो आप रिज के पास से रास्ता जाता है वहां से जा सकते हैं जो पैदल चढ़ाई करना चाहते हों ,एक दम सीधी चढ़ाई है इसलिए थोड़ी कठिन है पर दो घंटे में आप चढ़ाई कर सकते हैं |
2.दूसरा चर्च के पीछे से एक गवर्मेंट की टैक्सी चलती है वहां से जा सकते हैं वो केवल एक ही टैक्सी है जो वहां के स्थानीय लोगों के लिए सरकार द्वारा लगाई गई है उसी में वो कुछ यात्रियों को भी बिठा लेते हैं 10-10 रुपये लेकर ,उसके आते ही लोग झपट पड़ते हैं जो घुस गया वोही जा सकता है |
3.पोनी द्वारा भी आप चढ़ाई कर सकते हैं |
4. तीसरा आप किराये की टैक्सी लेकर भी वहां जा सकते हैं जिसका किराया सिर्फ वहीँ जाने के लिए 300 या 400 है ,अगर आप किसी और ट्रिप के साथ उसे लेते हैं तो इसका किराया 200 रुपये लिया जाता है |                             जाखू मंदिर जाने के लिए रिज के पास से ही रास्ता जाता है यह 2.5 किलोमीटर दूर है ,यहाँ पैदल, पोनी से या टैक्सी से जाया जा सकता है | भगवान हनुमान को समर्पित यह धार्मिक स्थल 'रिज' के निकट स्थित है।

जाखू मंदिर, जाखू पहाड़ी पर स्थित है | बर्फीली चोटियों, घाटियों और शिमला शहर का सुंदर और मनोरम दृश्य प्रस्तुत करता है। यहाँ से पर्यटक सूर्योदय और सूर्यास्त के लुभावने दृश्यों का आनंद ले सकते हैं।
                    तो जनाब हमने प्राइवेट टैक्सी लेने की सोची जो की एक किलोमीटर दूर खड़ी थी पहले वहां तक पैदल मार्च करना पड़ा हमें ,वहां पहुँचने के लिए हमें आधा घंटा लग गया 
उसके बाद हम टैक्सी में बैठे ,रास्ता काफी खतरनाक था सीधी चढ़ाई थी सिर्फ 15 मिनट में ही हम पहुँच गए हनुमान जी के जाखू मंदिर | गाड़ी से उतरने से पहले ही हमें ड्राईवर ने हिदायत कर दी की चश्मा उतार कर जेब में रख लें पर्स ,बैग या तो छुपा लें या यहीं गाड़ी में छोड़ कर जायें क्योंकि वहां के बंदर बहुत बदमाश हैं वो सब छीन ले जाते हैं | मंदिर के द्वार पर ही पहुंचे की किसी ने कहा लाठी साथ लेकर चलें बंदर बहुत हैं ,तब लाठी बेचने वाले ने कहा साथ प्रसाद लेना अनिवार्य है | खैर हम चल पड़े बंदरों से बचते बचाते सीड़ियाँ चढ़ते हुए ऊपर खुले मैदान में पहुंचते ही फिर बंदर हमारे पीछे पीछे आ गए क्योंकि मैंने अपना पर्स दुपट्टे के नीचे छुपा रखा था | मेरा दुपट्टा छीनने लगे ,तभी डैडी ने अपनी बेल्ट निकाली तो तब वो थोड़ा दूर भागे | आप पर्स वगेरह कुछ ना लेकर जायें तो बंदर दूर ही रहते हैं |
तब मंदिर के बाहर ही एक कमरा बना हुआ था जिसमें चप्पल वगेरह अपना सामान रख सकते थे |



उसके बाद मंदिर में गए यहाँ बाहर एक कर्मचारी वर्दी में तैनात था जो लाठी लिए हुए बंदरों को मंदिर में घुसने से हटा रहा था | मंदिर में जाकर दर्शन कर ,परिकर्मा की| वहां एक बोर्ड के ऊपर लिखा था की जब हनुमान संजीवनी बूटी लेने जा रहे थे तो यहाँ वो थोड़ी देर रुके थे | मंदिर दर्शन के बाद हम वापिस चप्पल पहन बंदरों से बचते बचाते गाड़ी तक पहुंचे | जो 15 मिनट में वापिस हमें ले आई ,उसके बाद फिर वोही आधा घंटा चल कर हम दोबारा होटल में पहुँच गए |
सभी तब तक तैयार हो चुके थे इसलिए हम सबने आसपास के दर्शनीय स्थलों को देखने का फैसला किया | इसके लिए हम रिज रोड पर आगे निकल गए क्योंकि वहां बहुत टैक्सी वाले दलाल आपको मिल जाते हैं , जिसका पता हमने लिया था उसके पास ही हम पहुँच गए उसके पास तीन चार अलग अलग ट्रिप की लिस्ट थी जिसमें से हमने पहला ट्रिप लिया जिसमें उसने हमें कुफरी,इंदिरा टूरिस्ट पार्क,चीनी बंगलो,फागू वैली ,नाग मंदिर दिखाना था | जिसका रेट 1400 रुपये बताया गया बड़ी गाड़ी का जबकि छोटी गाड़ी का रेट 1000 रुपये था ,वो 1600 रुपये में हमें ले जाने के लिए तैयार हो गया जिसमें हमने एक दूसरे ट्रिप की जगह एम्यूजमेंट पार्क भी शामिल किया था, जिसके 200 रुपये उसने फालतू लिए थे |
कुफरी 
   इसके बाद हम गाड़ी में बैठ निकले कुफरी की तरफ जो शिमला से 16 किलोमीटर दूर है ,रास्ते में एक जगह उसने रोक कर कहा यह ग्रीन वैली है ,हमने वापिसी में दिखाने के लिए कहा ,पहले सीधे कुफरी जाने की इच्छा जताई | कुफरी पहुँच कर उसने हमें उतार दिया गाड़ी पार्क कर दी और कहा यहाँ से घोड़े जाते हैं जो आपको फागू वैली नाग मंदिर महासू पीक एप्पल गार्डन दिखायेंगे | वहां से हमने घोड़े किये जिसका रेट तह था 380 रुपये प्रति सवारी ,घोड़े वाले ने जाने से पहले ही आगाह किया... पहुँचने में थोड़ा समय लगेगा आप लघुशंका से निवृत हो लें यहाँ पर भी उसकी सेटिंग थी ,अंदर गंदे से शौचालय में जाने के लिए 5 रुपये लिए गए |

               अब चले हम घोड़ों पर होकर सवार फागू वैली के लिए |हम आठ लोगों के साथ सिर्फ दो घोड़ों के रखवाले थे और रास्ता इतना गन्दा ,ऊँचा नीचा ,गहरे खड्डे और कहीं कहीं घुटनों घुटनों तक दलदल | जिसमें से सब राम राम करते ही निकल रहे थे | बचते बचाते हुए,घोड़ेवाले के निर्देशों का पालन करते हुए ...जैसे चढ़ाई के वक्त वो बोलता आगे झुको और पैर पीछे उतराई के वक्त वो बोलता पीछे को झुको और पैर आगे रखो ...
आखिर पहुंचे हम सब फागू वैली यहाँ घोड़े वाले ने उतार दिया और बोला एक घंटे बाद फ़ोन कर दें उसे बुलाने के लिए |






फागू वैली एक उजड़े हुए खेत के सिवाए कुछ भी नहीं था ,यहाँ दो याक थे जिस पर लोग फोटो खिंचवा रहे थे ,कुछ स्टाल टाइप की दुकानें जिन पर मैग्गी ,पेप्सी वगेरह मिल रही थी | एक दो दुकानों पर शाल स्वेटर भी रखे थे ,क्योंकि बारिश में ऊपर ठण्ड हो जाती होगी | वहां बैठे बैठे सबने मैग्गी वगेरह ले ली थी | फिर सब इधर उधर घूमने लगे ,हम कुछ लोग ऊपर नाग मंदिर चले गए |



थोड़ी दूरी पर ही यह मंदिर सामने ही नजर आता है वहां 20..25 सीड़ियाँ हैं यहाँ जाकर हम माथा टेक वापिस आ गए फोटो खींचते खिंचाते हुए ,यहीं साथ ही सेबों के बहुत से पेड़ हैं जिसे एप्पल वेल्ली के नाम से जाना जाता है |यहाँ भी बंदर बहुत नजर आते हैं |
    यहाँ से हम वापिस लौटे और फिर आकर घोड़े वाले को फ़ोन किया जो 15..20 मिनट में आ गया | फिर से हमें घोड़ों पर चढ़ाया गया पैर फंसाये गए और हिदायतें देते हुए हमें नीचे उतारने लगे घोड़े वाले |घोड़े अपनी मन मर्जी से चलते हुए हमें ढो कर चल ही रहे थे ,जब हम पहुँचने ही वाले थे तभी बेटे अभिषेक का घोड़ा गिर पड़ा और वो पता नही कैसे अपने पैर निकाल कर एक साइड को उछल गया यहाँ घोड़े वाले ने उसे एक दम से पकड़ लिया और वो ओंधे मुंह गिरने से बच गया | बस 5 मिनट बाद ही हम सब भी नीचे पहुँच गए और घोड़ों से उतर गए | 
    यहाँ घोड़ों पर चढ़ना बिलकुल भी सुरक्षित नहीं है इनके चक्कर में ना आयें | एक तो वहां देखने लायक कुछ भी नहीं दूसरा वहां पहुँचने का रास्ता बिल्कुल असुरक्षित है |सर्दिओं में यहाँ बर्फ़बारी देखने लोग आ सकते हैं |                   इसे देखने के बाद हम दोबारा गाड़ी में बैठ कर पहुँचे चिड़ियाघर देखने ,यहाँ की टिकट 10 रुपये थी ,हमने टिकट ले ली और चले जानवरों से रूबरू होने ..यह काफी बड़ी जगह में फैला हुआ है और जानवर खुले में पता नहीं कहाँ कहाँ छुपे बैठे थे उनके आसपास काफी बड़ी बाड़ लगी हुई थी | वहां ज्यादा जानवर नहीं हैं | 




इसे देखने के बाद हम वापिस आ गए क्योंकि चीनी बंगले में कुछ देखने लायक था नहीं सिर्फ एक पुराना बंगला है जिसमे अब रेस्तौरेंट बना दिया गया है | यहाँ खाने को भी ख़ास कुछ नहीं मिलता |                      
हम वापिस शिमला की तरफ चल पड़े | रास्ते में ही कुफरी से आते हुए 'हिप हिप हुर्रे' के नाम से एक एम्यूजमेंट पार्क है जिसमें बच्चों के लिए करने को काफी कुछ है ,इसकी प्रवेश टिकट तो 20 रुपये है लेकिन अंदर झूले लेने की या कुछ गेम के पैकज हैं जो 250 रुपये से 450 रुपये प्रति व्यक्ति टिकट है | इसमें एक रेस्तोरेंट भी है जिसमें आप चाय नाश्ता ले सकते हैं या खाना भी खा सकते हैं |यहाँ एक कपड़े की और एक मिठाई की दुकान है यहाँ कई प्रकार के फलों की बर्फी मिलती है | यहाँ सबने खूब मस्ती की ,फिर चाय पकौड़े लिए और बर्फी लेकर उसके बाद दोबारा हम बाहर आकर गाड़ी में बैठ गए |






           रास्ते में शिमला से कुछ किलोमीटर ही दूर ग्रीन वैल्ली है यहाँ गाड़ी रोकी गई ,वहां सड़क पर ही खड़े होकर आप बस पीछे के हरे भरे पेड़ों की तस्वीर ले सकते हैं इसी को ग्रीन वैल्ली कहते हैं | 



        इसके बाद हम सब वापिस पहुँचे शिमला के टैक्सी स्टैंड की तरफ जो लक्कड़ बाजार के पास है | वहां टैक्सी वाले ने हमें उतार दिया ,यहाँ से फिर पैदल चल कर आपको जाना पड़ता है ,यहाँ से आगे गाड़ियाँ नहीं जाती हैं | हम वापिस बाजार में घूमते हुए वापिस होटल पहुँचे और कुछ चाय पकौड़े का दौर चला और साथ ही सब पैकिंग वगेरह करने लगे क्योंकि सुबह हमें निकलना था ,थोड़ी देर सबने आराम किया और फिर रात को हम सब खाना खाने के लिए निकले | हमने खाना खाया और वापिस होटल पहुँच गए और बाकी की पैकिंग हमने कर ली और सो गए |


Shimla photos, Night view of Shimla

शिमला रात का नजारा 
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