शुक्रवार, 25 जनवरी 2013

''..माँ वैष्णो देवी..''




मैया के दर्शन में बर्फ का नज़ारा,
मैया है जीती और इंसान हारा!

बेबस जो ना पा सके तेरा द्वारा,
हमने तो पाया है दर्शन तुम्हारा!

पुरानी गुफा में सुना ,है वास तेरा,
करती तू पार अपने भक्तों का बेड़ा!

कितने बरस में है तुमने बुलाया,
हमने दिल का हाल तुमको सुनाया!

अगले बरस हम सबको जल्दी बुलाना,
अच्छा नहीं यूँ अपने भक्तों को भुलाना!

मुरादें जो सबकी है यूँ ही पूरी करना, 
संकट हो जब कोई तू ही इसे हरना!

अपने सब बच्चों को आशीर्वाद देना,
दिया जो सबको वो वापिस ना लेना!!

11 टिप्‍पणियां:

  1. '..जय माँ वैष्णो देवी..''
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति ...
    कभी गाँव में बर्फ में खेलना हमें बहुत भाता था ...जब से शहरी हुए बमुश्किल बर्फ देखने को मिली ...वैसे तब बहुत कठिन दिन थे वे .....

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    उत्तर
    1. सही कहा आपने कविता जी गाँव तो कहीं दूर बिछूड़ गये हैं शहरों से

      हटाएं
  2. बहुत ही सुंदर भक्तिमय प्रार्थना , मां को नमन ........
    (कृपया वर्ड वरिफिकेसन हटा दीजिये )

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  3. तुम भक्तों के रखबाले हो दुःख दर्द मिटने बाले हो
    तेरे चरणों में मुझे जगह मिले अधिकार तुम्हारे हाथों में

    http://madan-saxena.blogspot.in/
    http://mmsaxena.blogspot.in/
    http://madanmohansaxena.blogspot.in/
    http://mmsaxena69.blogspot.in/

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  4. सजा हुआ सबके लिए, माता का दरबार।
    माता अपने भक्त को, देती है उपहार।।

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  5. बहुत सुंदर भावों के साथ आपने माता की आराधना की है..........जय माता दी

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  6. माँ तो माँ ही होती है वह कहां किसी को भुलाती होगी, हम ही भुला देते हैं शायद उसे !!!

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